अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
झील पर जैसे कोई काली घटा छा जाए
नीली आँखों पे घनी पलकों को डाले रखना
- शाहिद फ़रीद
तिरी ज़मीं से उठेंगे तो आसमाँ होंगे
हम ऐसे लोग ज़माने में फिर कहाँ होंगे
- इब्राहीम अश्क
अपना लहू भर कर लोगों को बाँट गए पैमाने लोग
दुनिया भर को याद रहेंगे हम जैसे दीवाने लोग
- कलीम आजिज़
याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था
- नासिर काज़मी
इश्क़ को एक उम्र चाहिए और
उम्र का कोई ए'तिबार नहीं
- जिगर बरेलवी
यूँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया
हम ने दिल खोल कर दिखाई चोट
- फ़ानी बदायूंनी
Urdu Poetry: जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं