अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
जो थी बहार तो गाते रहे बहार का राग
ख़िज़ाँ जो आई तो हम हो गए ख़िज़ाँ की तरफ़
- जलील मानिकपुरी
जो थी बहार तो गाते रहे बहार का राग
ख़िज़ाँ जो आई तो हम हो गए ख़िज़ाँ की तरफ़
- जलील मानिकपुरी
भोली बातों पे तेरी दिल को यक़ीं
पहले आता था अब नहीं आता
- आरज़ू लखनवी
झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
- शारिक़ कैफ़ी
अब और इस के सिवा चाहते हो क्या 'मुल्ला'
ये कम है उस ने तुम्हें मुस्कुरा के देख लिया
- आनंद नारायण मुल्ला
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
Urdu Poetry: सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा