अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
उस की भी मिरी तरह थी इक अपनी कहानी
उस को भी निभाना पड़ा किरदार मुझे भी
- शकील जाज़िब
मुझ को अक्सर उदास करती है
एक तस्वीर मुस्कुराती हुई
- विकास शर्मा राज़
औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे
- ख़लील तनवीर
माँग लूँ तुझ से तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है
- अमीर मीनाई
आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो
नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है
- जाँ निसार अख़्तर
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
- अहमद फ़राज़
Urdu Poetry: मुझे किसी पे भी अब कोई ए'तिबार नहीं