अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
- जिगर मुरादाबादी
फ़रिश्ता है तो तक़द्दुस तुझे मुबारक हो
हम आदमी हैं तो ऐब-ओ-हुनर भी रखते हैं
- दिल अय्यूबी
देवता बनने की हसरत में मुअल्लक़ हो गए
अब ज़रा नीचे उतरिए आदमी बन जाइए
- सलीम अहमद
शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
- साजिद प्रेमी
उस को हँसता देख के फूल थे हैरत में
वो हँसती थी फूलों की हैरानी पर
- अम्मार यासिर मिगसी
Urdu Poetry: आइना ये तो बताता है कि मैं क्या हूँ मगर