अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मुझ से नफ़रत है अगर उस को तो इज़हार करे
कब मैं कहता हूँ मुझे प्यार ही करता जाए
- इफ़्तिख़ार नसीम
इश्क़ में कौन बता सकता है
किस ने किस से सच बोला है
- अहमद मुश्ताक़
मैं उस के सामने से गुज़रता हूँ इस लिए
तर्क-ए-तअल्लुक़ात का एहसास मर न जाए
- फ़ना निज़ामी कानपुरी
मक़्बूल हों न हों ये मुक़द्दर की बात है
सज्दे किसी के दर पे किए जा रहा हूँ मैं
- जोश मलसियानी
सारी ख़ुशी हमारी आँखों से छन रही है
कुछ देर तुम ने गेसू लहरा दिए तो क्या है
- रउफ़ रज़ा
बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो
- ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
Urdu Poetry: ये दुनिया नफ़रतों के आख़री स्टेज पे है