Urdu Poetry: अँधेरे छू नहीं सकते हैं मुझ को

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

Image Credit :

अँधेरे छू नहीं सकते हैं मुझ को
कि मेरे साथ तेरी रौशनी है
- शारिब लखनवी  

Image Credit :

जब आ जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मरकज़ पर
तो वापस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यूँ नहीं आते
- इबरत मछलीशहरी  

Image Credit :

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Image Credit :

उन्हें ठहरे समुंदर ने डुबोया
जिन्हें तूफ़ाँ का अंदाज़ा बहुत था
- मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद  

Image Credit :

दिल से आती है बात लब पे 'हफ़ीज़'
बात दिल में कहाँ से आती है
- हफ़ीज़ होशियारपुरी

Image Credit :

तुम अभी शहर में क्या नए आए हो
रुक गए राह में हादसा देख कर
- बशीर बद्र

Image Credit :

Urdu Poetry: उस की भी मिरी तरह थी इक अपनी कहानी

Read Now