Urdu Poetry: आदमी अपने ख़यालात लिए फिरता है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली   

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आसमाँ अपने इरादों में मगन है लेकिन
आदमी अपने ख़यालात लिए फिरता है
- अनवर मसूद  

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बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग
पड़ता है आसमान का साया ज़मीन पर
- हमदम कशमीरी    

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सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं
जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं
- सुदर्शन फ़ाकिर 

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भीड़ तन्हाइयों का मेला है
आदमी आदमी अकेला है
-  सबा अकबराबादी

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चमक रहा है ख़ेमा-ए-रौशन दूर सितारे सा
दिल की कश्ती तैर रही है खुले समुंदर में
- ज़ेब ग़ौरी 

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प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
- हस्तीमल हस्ती

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Urdu Poetry: मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए

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