Urdu Poetry: फूल ही फूल याद आते हैं आप जब जब भी मुस्कुराते हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
- साजिद प्रेमी  

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कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

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कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है
- नातिक़ लखनवी

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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
- वसीम बरेलवी 

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Urdu Poetry: कि पास उन के रहता हूँ मैं दूर हो कर

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