अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
उस की भी मिरी तरह थी इक अपनी कहानी
उस को भी निभाना पड़ा किरदार मुझे भी
- शकील जाज़िब
हम पे ये राज़ खुला भी तो बहुत देर के बा'द
अस्ल किरदार कहानी में किसी और का है
- असद बिजनौरी अलीग
मुद्दत से ख़्वाब में भी नहीं नींद का ख़याल
हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतिज़ार है
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
रवाँ-दवाँ है ज़िंदगी चराग़ के बग़ैर भी
है मेरे घर में रौशनी चराग़ के बग़ैर भी
- अख्तर सईदी
फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का
न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है
- अल्लामा इक़बाल
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
- अल्लामा इक़बाल
Urdu Poetry: आसमाँ अपने इरादों में मगन है लेकिन