अमर उजाला
Fri, 21 April 2023
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
~ फ़रहत एहसास
वो कौन था जो दिन के उजाले में खो गया
ये चाँद किस को ढूँडने निकला है शाम से
~ आदिल मंसूरी
ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
इक चाँद फ़लक पर निकला हो इक चाँद सर-ए-बाम आ जाए
~ अनवर मिर्ज़ापुरी
भगत सिंह के कुछ पसंदीदा अशआर