अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा
मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा
- इक़बाल साजिद
रास आने लगी दुनिया तो कहा दिल ने कि जा
अब तुझे दर्द की दौलत नहीं मिलने वाली
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
इंक़लाब एक ख़्वाब है सो है
दिल की दुनिया ख़राब है सो है
- जौन एलिया
Urdu Poetry: उसी के क़दमों की आहट का इंतिज़ार भी है