Motivational Shayari: यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का

अमर उजाला

Mon, 1 December 2025

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मिरे नाख़ुदा न घबरा ये नज़र है अपनी अपनी
तिरे सामने है तूफ़ाँ मिरे सामने किनारा

~ फ़ारूक़ बाँसपारी

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क़तरा न हो तो बहर न आए वजूद में
पानी की एक बूँद समुंदर से कम नहीं

~ जुनैद हज़ीं लारी
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रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं

~ मिर्ज़ा ग़ालिब
 

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साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है

~ आल-ए-अहमद सुरूर
 

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सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का
यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का

~ शहरयार

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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं

~ माहिर-उल क़ादरी
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