अमर उजाला
Fri, 28 April 2023
हम को इतना भी रिहाई की ख़ुशी में नहीं होश
टूटी ज़ंजीर कि ख़ुद पाँव हमारा टूटा
~आरज़ू लखनवी
शायद कि रिहाई हो गुल ही की ज़मानत पर
हम मौज-ए-तबस्सुम की ज़ंजीर के क़ैदी हैं
~अहमद महफ़ूज़
जाने क्या सोच के फिर इन को रिहाई दे दी
हम ने अब के भी परिंदों को तह-ए-दाम किया
~अम्बर बहराईची
Urdu Shayari: आज के चुनिंदा शेर