Hindi Shayari: 'रिहाई' पर कहे गए शेर

अमर उजाला

Fri, 28 April 2023

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हम को इतना भी रिहाई की ख़ुशी में नहीं होश 
टूटी ज़ंजीर कि ख़ुद पाँव हमारा टूटा 

~आरज़ू लखनवी

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ये क़ैद है तो रिहाई भी अब ज़रूरी है 
किसी भी सम्त कोई रास्ता मिले तो सही

~अब्दुल हमीद
 
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शायद कि रिहाई हो गुल ही की ज़मानत पर 
हम मौज-ए-तबस्सुम की ज़ंजीर के क़ैदी हैं 

~अहमद महफ़ूज़

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रिहा किया भी क़फ़स से तो कब किया सय्याद 
अब आशियाँ में भी कुछ लुत्फ़-ए-आशियाँ न रहा 

~अज्ञात
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जाने क्या सोच के फिर इन को रिहाई दे दी 
हम ने अब के भी परिंदों को तह-ए-दाम किया 

~अम्बर बहराईची

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राय पहले से बना ली तू ने 
दिल में अब हम तिरे घर क्या करते 

~परवीन शाकिर
 
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Urdu Shayari: आज के चुनिंदा शेर

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