अमर उजाला
Tue, 8 August 2023
अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई
मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई
~ गोपालदास नीरज
रुकी रुकी सी है बरसात ख़ुश्क है सावन
ये और बात कि मौसम यही नुमू का है
~ जुनैद हज़ीं लारी
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है
~ गुलज़ार
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
~ निदा फ़ाज़ली
ये हुस्न-ए-नौ-बहार ये सावन की बदलियाँ
पीना है फ़र्ज़ और न पीना हराम आज
~ अज्ञात
Urdu Poetry: ख़त पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़