अमर उजाला
Mon, 22 May 2023
शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए
~ राहत इंदौरी
ये धूप तो हर रुख़ से परेशाँ करेगी
क्यूँ ढूँड रहे हो किसी दीवार का साया
~ अतहर नफ़ीस
गर्मियों भर मिरे कमरे में पड़ा रहता है
देख कर रुख़ मुझे सूरज का ये घर लेना था
~ ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
Urdu Poetry: दिल्ली पर चुनिंदा शेर