Urdu Poetry: ख़त पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
- गुलज़ार
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
- हस्तीमल हस्ती
ज़िंदगी कम पढ़े परदेसी का ख़त है 'इबरत'
ये किसी तरह पढ़ा जाए न समझा जाए
- इबरत मछलीशहरी
अंधेरा है कैसे तिरा ख़त पढ़ूँ
लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे
- मोहम्मद अल्वी
बुलाऊँगा न मिलूँगा न ख़त लिखूँगा तुझे
तिरी ख़ुशी के लिए ख़ुद को ये सज़ा दूँगा
- नासिर काज़मी
Hindi Shayari: तपती दोपहर और गर्मी पर चुनिंदा अशआर