Urdu Poetry: दिल्ली पर चुनिंदा शेर
दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है
जो भी गुज़रा है उस ने लूटा है
- बशीर बद्र
चेहरे पे सारे शहर के गर्द-ए-मलाल है
जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है
- मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद
दिल्ली कहाँ गईं तिरे कूचों की रौनक़ें
गलियों से सर झुका के गुज़रने लगा हूँ मैं
- जाँ निसार अख़्तर
इन दिनों गरचे दकन में है बड़ी क़द्र-ए-सुख़न
कौन जाए 'ज़ौक़' पर दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
दिल्ली में अपना था जो कुछ अस्बाब रह गया
इक दिल को ले के आए हैं उस सरज़मीं से हम
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
Hindi Shayari: आदिल मंसूरी के चुनिंदा शेर