Urdu Poetry: तितली के लिए चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क

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गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो
आँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा
- कैफ़ भोपाली

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बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए
- निदा फ़ाज़ली

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काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन
तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा
- परवीन शाकिर

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तितली के जैसी है मेरी हर ख़्वाहिश
हाथ लगाने से पहले उड़ जाती है
- ज़ुबैर अली ताबिश 

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तितली भौंरे कलियाँ फूल
इस के सब दीवाने थे
- ख़ालिद नदीम बदायूंनी

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Urdu Poetry: तारों के लिए चुनिंदा शेर

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