Urdu Poetry: कुदरत के लिए कहे ख़ूबसूरत शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क 

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जिन को क़ुदरत ने हुस्न बख़्शा हो
क़ुदरतन कुछ शरीर होते हैं 
- अब्दुल हमीद अदम 

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मुझ को हैरत है उस की क़ुदरत पर
अलम उस को घटा नहीं सकता
- अकबर इलाहाबादी 

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तेरी सूरत को देखता हूँ मैं
उस की क़ुदरत को देखता हूँ मैं
- दाग़ देहलवी 

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ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत है
वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है
- बशीर बद्र 

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रखते हैं जो अल्लाह की क़ुदरत पे भरोसा
दुनिया में किसी की वो ख़ुशामद नहीं करते
- मुहम्मद अय्यूब ज़ौक़ी 

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Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर

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