बता दें कि मानसिक तनाव और कब्ज के बीच बहुत गहरा संबंध है। इसे चिकित्सा विज्ञान में 'गट-ब्रेन एक्सिस' कहा जाता है।
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हमारा मस्तिष्क और पाचन तंत्र आपस में हजारों नसों के जरिए जुड़े होते हैं, इसलिए जब दिमाग तनाव में होता है, तो उसका सीधा असर पेट पर पड़ता है।
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पाचन की गति धीमी होना
जब हम तनाव या चिंता में होते हैं, तो शरीर 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है। इससे पाचन तंत्र को मिलने वाला ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है और मल त्याग की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।
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हार्मोनल बदलाव
तनाव के दौरान शरीर 'कोर्टिसोल' और 'एड्रीनलीन' जैसे हार्मोन रिलीज करता है। ये हार्मोन आंतों की मांसपेशियों के संकुचन को प्रभावित करते हैं, जिससे पेट साफ होने में कठिनाई होती है।
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अनियमित जीवनशैली
तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर पर्याप्त पानी नहीं पीता है, नींद की कमी का शिकार होता है और जंक फूड का सेवन करता है। ये सभी आदतें मिलकर कब्ज की समस्या को गंभीर बना देती हैं।
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क्या करें?
ऐसी स्थिति में कब्ज दूर करने के लिए केवल दवाएं ही काफी नहीं हैं; योग, ध्यान और पर्याप्त नींद के जरिए तनाव को कम करना भी उतना ही जरूरी है।