कई स्टडी में ये देखने को मिला है कि, तनाव और वजन बढ़ने के बीच गहरा संबंध है।
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असल में जब हम मानसिक तनाव से गुजरते हैं, तो हमारा शरीर 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है, जिससे कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है।
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फैट स्टोरेज
कॉर्टिसोल शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है और शरीर को ऊर्जा बचाने के लिए संकेत देता है। इसके कारण फैट विशेष रूप से पेट के आसपास जमा होने लगती है, जिसे 'स्ट्रेस बेली' भी कहा जाता है।
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इमोशनल ईटिंग
तनाव की स्थिति में मस्तिष्क अधिक एनर्जी की मांग करता है, जिससे हमें मीठा और हाई-कैलोरी जंक फूड खाने की तीव्र इच्छा होती है। इसे 'कम्फर्ट ईटिंग' कहते हैं, जो वजन को तेजी से बढ़ाती है।
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नींद की कमी
तनाव के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे भूख बढ़ाने वाले हार्मोन 'घ्रेलिन' का स्तर बढ़ जाता है और पेट भरा होने का संकेत देने वाले हार्मोन 'लेप्टिन' का लेवल गिर जाता है।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस
लगातार बढ़ा हुआ कॉर्टिसोल ब्लड शुगर लेवल को भी प्रभावित करता है, जिससे शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है और वजन घटाना मुश्किल हो जाता है।