अमर उजाला
Sun, 31 May 2026
एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) को बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है।
इसकी मात्रा बढ़ने पर धमनियों में फैट जमा होने लगता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है।
लंबे समय तक हाई एलडीएल हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
एलडीएल हाई रहना हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाता है।
इससे स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ जाता है।
हाई एलडीएस पेरिफेरल आर्टरी डिजीज का कारण बन सकता है।
एलडीएल बढ़ने से सीने में दर्द (एंजाइना) का जोखिम बढ़ाता है।
न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के क्या लक्षण होते हैं?