अमर उजाला
Thu, 8 January 2026
टाइप-1 डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। बच्चे इसका शिकार ज्यादा होते हैं।
ये ऑटो इम्यून बीमारी है जिसमें इम्यून सिस्टम शरीर की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देती है।
टाइप-1 में इंसुलिन बनता ही नहीं, जबकि टाइप-2 में इंसुलिन बनता तो है लेकिन सही से काम नहीं करता।
इंसुलिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और टाइप-1 डायबिटीज में इसकी पूर्ति बाहर से करनी पड़ती है।
यह बीमारी ज्यादातर बच्चों, किशोरों और युवाओं में पाई जाती है।
बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, अचानक वजन घटना, थकान और धुंधला दिखना इसके लक्षण हैं।
टाइप-1 डायबिटीज में रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लेने की जरूरत होती है।
मरीजों को हेल्दी कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन करने तथा नियमित एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के लिए क्या न करें?