अमर उजाला
Sun, 11 January 2026
इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, इससे टाइप-2 डायबिटीज हो सकता है।
जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं, तो इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है।
इसके कारण पैंक्रियाज को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है और धीरे-धीरे ब्लड शुगर बढ़ने लगती है।
पेट के आसपास जमा फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस का सबसे बड़ा कारण मानी जाती है।
शरीर का सिर्फ 5-10% वजन कम करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस में बड़ा सुधार देखा जा सकता है।
रोज 30-45 मिनट की वॉक, रनिंग या व्यायाम की मदद से ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
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