इन्सोम्निया को क्यों माना जाता है 'स्लो पॉइजन'?

अमर उजाला

Thu, 2 October 2025

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इन्सोम्निया को 'स्लो पॉइजन' यानी धीमा जहर इसलिए माना जाता है क्योंकि यह तुरंत ज्यादा प्रभावित तो नहीं करता, लेकिन लंबे समय तक बने रहने पर यह धीरे-धीरे शरीर और दिमाग को अंदर से खोखला कर देता है। 
 

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यह एक ऐसी समस्या है जो शरीर के लगभग हर प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

 

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लगातार नींद की कमी से कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
 

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यह शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को भी प्रभावित करता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है।

 

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इसके अलावा पर्याप्त नींद न लेने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है। 
 

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मानसिक स्वास्थ्य पर इसका सबसे गहरा असर पड़ता है; नींद की कमी से चिंता, डिप्रेशन, और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। 
 

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यह हमारी याददाश्त, फोकस करने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति को भी गंभीर रूप से कमजोर करता है।

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