इस किले में आज भी आता है अश्वत्थामा

अमर उजाला

Wed, 25 May 2022

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मध्य प्रदेश की सतपुड़ा पहाड़ियों पर असीरगढ़ का किला स्थित है
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बुरहानपुर जिले से असीरगढ़ फोर्ट की दूरी महज 20 किमी है
 
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समुद्र तल से लगभग 250 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह किला अपने वैभवशाली अतीत की दास्तां सुनाता है।
 
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इस किले का निर्माण आशा अहीर नाम के एक चरवाहे ने कराया था
 
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किले की तारीफ सुनने के बाद नसीर खां फारुखी ने धोखे से आशा अहीर की हत्या कर किले पर कब्जा कर लिया था
 
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असीरगढ़ किला दुनिया के अभेद्य किलों में से एक है, मुगल काल में इसे दक्कन की चाबी कहा जाता था
 
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इस किले पर कब्जा करने के लिए अकबर की सेना ने 11 महीने तक इंतजार किया था, लेकिन फिर भी वह इसे जीत नहीं पाया था

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बाद में अकबर ने बहादुर शाह को धोखे से फंसाकर इस किले पर कब्जा कर लिया था
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इस किले से कई रहस्य जुड़े हैं, कहा जाता है कि यहां अश्वत्थामा आज भी भटकता है
 
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किले में मौजूद प्राचीन गुप्तेश्वर मंदिर में अश्वत्थामा भगवान शिव की पूजा करने आता है, मंदिर खोलने पर सुबह कई बार लोगों ने शिवलिंग पर ताजे फूल चढ़े देखे हैं

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असीरगढ़ का किला 60 एकड़ में फैला है। किले में पांच तालाब हैं, जिनका जल किसी भी मौसम में नहीं सूखता
 
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असीरगढ़ का किला इतना भव्य है कि यहां एक पूरा गांव बसाया जा सकता है
 
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किले में अनाज संग्रहण के साथ ही बारिश का जल एकत्रित करने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था
 
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किले तक जाने के दो रास्ते हैं, किले तक पहुंचने के लिए लगभग 1000 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं
 
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असीरगढ़ किले को देखने के लिए किसी भी सीजन में आया जा सकता है
 
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यहां सड़क, रेल और वायुमार्ग के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है
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