जानिए देवी अहिल्या बाई से जुड़ी खास बातें

अमर उजाला

Mon, 30 May 2022

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देवी अहिल्या बाई होलकर की 296 वीं जयंती इंदौर के गौरव दिवस के रूप में मनाई जा रही है
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अहिल्या बाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में हुआ था 

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1733 में महज 8 साल की उम्र में अहिल्या बाई का विवाह मल्हारराव होलकर के पुत्र खांडेराव होलकर से हुआ था
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1754 में एक युद्ध में खांडेराव की मौत हो गई, जिसके बाद अहिल्या बाई ने सती होने का फैसला लिया, लेकिन ससुर मल्हारराव ने उन्हें रोक लिया  
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1766 में उनके ससुर और उसके 9 महीने बाद उनके पुत्र की मृत्यु हो गई, जिसके बाद अहिल्या बाई ने मार्च 1767 को राजगादी संभाली
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अपने शासनकाल के दौरान अहिल्या बाई ने इंदौर की जगह महेश्वर को मालवा रियासत की राजधानी बनाया 
 

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वह भगवान शंकर की अनन्य भक्त थीं, उन्होंने मालवा की राजगादी भगवान शिव को समर्पित कर दी थी, वे हर आदेश पर हुजूर शंकर लिखा करती थीं
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उन्होंने मालवा में 28 साल शासन किया, अपने शासन काल में देशभर में 65 मंदिर, कई धर्मशालाएं, अन्न क्षेत्र, सड़क, कुएं और बावड़ियां बनवाई थीं
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उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार, मर्णिकर्णिका घाट समेत 13 घाटों का निर्माण, उज्जैन में नौ मंदिरों का निर्माण कराया था
 

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उनके शासनकाल से जुड़े कई किस्से उनके न्याय और कुशल शासिका होने का परिचय देते हैं
 
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अपने शासनकाल के दौरान जमीन विवादों का निराकरण करने के लिए अहिल्या बाई ने खसरा नियम बनाया था
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होलकर रियासत की देखरेख का बोझ जनता पर न पड़े इसके लिए अहिल्या बाई ने खासगी ट्रस्ट बनवाया था
 

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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अहिल्या बाई ने मालवा में बुनकर उद्योग की स्थापना की थी 
 
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देवी अहिल्या बाई के शासनकाल में मालवा साम्राज्य ने नए आयाम छुए थे
 
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देवी अहिल्या बाई होलकर अपने नियमों की बहुत पक्की थी, नियमों की अनदेखी होने पर पति और ससुर को भी टोक दिया करती थीं
 
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एक बार पुत्र मालोजीराव से गलती होने पर अहिल्या बाई ने पुत्र को हाथी के पैरों तले कुचलने का आदेश दे दिया था
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देवी अहिल्या बाई कुशल शासक, बहादुर रानी और प्रजा वत्सल राजमाता के रूप में आज भी जानी जाती हैं
 
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