महाकाल धाम में जारी है यह प्राचीन परंपरा

अमर उजाला

Mon, 23 May 2022

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मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है
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12 ज्योतिर्लिंग में महाकालेश्वर चौथे नंबर पर आता है
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यह इकलौता दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है

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हर दिन बाबा महाकाल की छह बार आरती होती है
 

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भगवान महाकाल के दिन की शुरुआत सुबह 4 बजे भस्म आरती से होती है। इसके साथ ही महाकाल के पट खोले जाते हैं 
 
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भगवान महाकाल की भस्म आरती की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है
 

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भस्म आरती में बाबा महाकाल का भांग, मेवों, फूलों और भस्म से श्रृंगार किया जाता है
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भस्म आरती के बाद 7 बजे दत्योदक आरती, सुबह 10 बजे भोग आरती, शाम 5 बजे पूजन आरती, शाम 7 बजे संध्या आरती की जाती है।
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रात में 10:30 बजे बाबा महाकाल की शयन आरती की जाती है, इसके बाद पट बंद हो जाते हैं
 
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बाबा महाकाल का हर दिन विशेष श्रृंगार किया जाता है
 
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सोमवार को चंद्रमौली, मंगलवार को हनुमान, बुधवार को गणेश जी, अर्धनारीश्वर, नागदेव और कई रुप में ज्योतिर्लिंग का श्रृंगार किया जाता है
 
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त्यौहार और खास पर्व पर भी ज्योतिर्लिंग को विशेष स्वरूप में सजाया जाता है
 
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रोजाना हजारों भक्त बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन करने पहुंचते हैं

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