भोपाल से 32 किमी की दूरी पर पहाड़ी पर एक बहुत बड़ा अधूरा शिव मंदिर है। ये भोजपुर शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है।
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इस मंदिर में भगवान शिव के पूजा अर्चना करने का तरीका भी एकदम अलग है। यहां अभिषेक हमेशा जलहरी पर चढ़कर ही किया जाता है।
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सावन के महीने में हर दिन इस मंदिर में विशेष पूजा की जाती है। इस प्राचीन शिव मंदिर में पूरे सावन में भक्तों का तांता लगा रहता है।
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मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज ने करवाया था। ये एक एकलौता शिवलिंग है जो एक है पत्थर से बना हुआ है।
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मंदिर का निर्माण 106 फीट लंबे, 77 फीट चौड़े, 17 फीट ऊंचे पत्थर के चबूतरे पर किया गया है। मंदिर का अपूर्ण शिखर 40 फीट ऊंचे पूर्ण स्तंभों व 12 अधूरे अद्ध स्तभों पर बना हुआ है।
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यह राष्ट्रीय महत्व का पुरातत्व संरक्षित स्मारक है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित चमकदार बलुआ पत्थर से निर्मित 2.03 मीटर ऊंचा शिवलिंग है जो विश्व में 11वीं शताब्दी की प्राचीनता में कहीं नहीं है।
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साल में दो बार यहां मेला लगता है, एक बार संक्रांति के दौरान और दूसरा शिवरात्रि के समय, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लाखों की संख्या में लोग आते हैं।
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मंदिर के बाहर लगे पुरातत्त्व विभाग के शिलालेख अनुसार इस मंदिर का शिवलिंग भारत के मंदिरों में सबसे ऊंचा एवं विशालतम शिवलिंग है।
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