मांडव: प्यार की दास्तां सुनातीं इमारतें

अमर उजाला

Sun, 12 June 2022

Image Credit : सोशल मीडिया

मांडव को मांडू और मांडवगढ़ के नाम से भी जाना जाता है। यह विंध्याचल की पहाड़ियों पर लगभग 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 

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मांडू में 40 से अधिक स्मारक हैं। सबकी सब नायाब। जो हमें इतिहास की समृद्ध विरासत के दर्शन कराती हैं। 
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मांडव मध्य प्रदेश का ऐसा पर्यटन स्थल है, जो रानी रूपमती और बाजबहादुर के अमर प्रेम का साक्षी माना जाता है। 
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धार जिला मुख्यालय से मांडव 30 किलोमीटर की दूरी पर है। इंदौर हवाई अड्डे से इसकी दूरी करीब 95 किमी है। 
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जुलाई से मार्च महीने के बीच का समय मांडव घूमने के लिए सबसे बेहतर माना गया है। हल्की बारिश में यहां घूमना अलग ही मजा देता है। 
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प्रवेश के घुमावदार रास्तों के साथ ही मांडव के बारे में जानने और इसकी खूबसूरत इमारतों को देखने की रुचि बढ़ जाएगी। 
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रानी रूपमति का महल, हिंडोला महल, जहाज महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल के साथ-साथ मांडव खुरासानी इमली के लिए भी प्रसिद्ध है। 

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मांडव में श्री चतुर्भुज राम मंदिर है जो कि दुनिया का एक मात्र ऐसा मंदिर है जिसमें राम भगवान की चार भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है।

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जैन मंदिर मांडव के प्राचीन जैन तीर्थों में गिना जाने वाला आकर्षक पर्यटन स्थल है। जैन मंदिर में प्रसिद्ध जैन तीर्थकरों की सोने, चांदी और संगमरमर की मूर्तियां स्थापित हैं। 

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माना जाता है कि सम्राट शाहजहां ने ताज महल के निर्माण की प्रेरणा मांडव के होशंगशाह के मकबरे से ली थी।
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फाइल फोटो
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