दिनभर में पांच बार होने वाली आरतियों में तीन अलग-अलग आरतियों का गायन किया जाता है
Image Credit : Amar Ujala
सर्वप्रथम सुबह 3 बजे भस्म आरती की जाती है, जिसमें भगवान के श्रृंगार के बाद 'जय मंगलमूर्ति शिवमंगल मूर्ति दर्शन मात्रे मन सुमिरन मात्रे मन कामना पूर्ति' का गायन किया जाता है
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इसके जरिए भगवान शिव, मां पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदीजी समेत सभी प्रमुखजन जो गर्भग्रह और आसपास विराजित हैं की आरती की जाती है
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सुबह 7 बजे भोग आरती की जाती है, जिसमें 'कर्पूर गौरम करुणावतारम संसार सारम भुजगेंद्र हारम' के माध्यम से श्लोक के स्वरूप में महाकाल की आरती की जाती है
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सुबह 10 बजे भगवान शिव की आरती 'कर्पूर गौरम करुणावतारम संसार सारम भुजगेंद्रहारम' के माध्यम से की जाती है
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शाम 7 बजे प्रतिदिन भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान फिर बाबा महाकाल की पूरे परिवार समेत 'जय मंगलमूर्ति शिवमंगल मूर्ति' आरती की जाती है
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यह आरती गाकर कामना की जाती है कि जो भी भक्त भगवान के आनंदमय मंगलमयी दर्शन करता है, उनके सभी कष्टों का निवारण हो जाए
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रात्रि 10 'जय शिव ओंकारा भज हर शिव ओंकारा' की आरती के साथ शिव आराधना करते हुए बाबा महाकाल को शयन करवाया जाता है
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अनोखी है परंपरा, इसलिए कहलाते हैं 'अर्जी वाले महादेव'