इस वजह से वसुंधरा राजे को इग्नोर नहीं कर सकती बीजेपी
अमर उजाला
Fri, 29 September 2023
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राजस्थान विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने अभी तक जो संकेत दिए हैं, उससे लगता है कि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे किनारे लगाई जा चुकी हैं
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दूसरी ओर राजे को जो लोग नजदीक से जानते हैं, उनका कहना है, वो चुपचाप बैठकर तमाशा देखने वालों में से नहीं हैं, नया दल बना सकती हैं, पार्टी में रहते हुए भी बहुत कुछ कर सकती हैं
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पिछले चुनाव (2018) के आंकड़ों पर नजर डालें तो, पांच प्रतिशत से कम अंतर से करीब 30 प्रतिशत सीटें जीतीं गईं हैं, साल 2003 और 2008 के चुनावों में तो और भी कड़ा मुकाबला रहा है
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कांग्रेस-बीजेपी ने 41.5 प्रतिशत से ज्यादा सीटें मामूली अंतर से जीतीं थीं, कहने का मतलब इतना ही है, अगर वसुंधरा ने पांच प्रतिशत वोट भी इधर-उधर किए तो बीजेपी के साथ खेला हो जाएगा
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महिलाओं के बीच वसुंधरा बहुत लोकप्रिय रही हैं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं के बीच अपनी मजबूत छवि के कारण राजे को इस अभियान में सबसे आगे रखना चाहिए था
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साल 2013-2018 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा है, कांग्रेस सरकार में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ने का आरोप लगाकर बीजेपी ने जो माइलेज लिया था, वसुंधरा के चलते गंवाना पड़ सकता है
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वसुंधरा अपने को क्षत्राणि की बेटी, जाटों की बहू और गुर्जरों को समधन कहकर राज्य में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीनों जातियों को साधतीं रहीं हैं, राजे के बेटे की शादी गुर्जर समुदाय में हुई है
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राजे राजस्थान में बीस से पच्चीस सीटों पर बीजेपी को नुकसान पहुंचाने की कूवत रखती हैं, क्योंकि वसुंधरा अपने समर्थकों को इशारा कर सकती हैं कि अगर उन्हें पार्टी टिकट नहीं देती है तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं
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