कठपुतली का खेल दिखाने वाले भट्ट समुदाय थे, जो मुख्य रूप से कृषक थे, बाद में शाही परिवारों के मनोरंजन करने वाले बन गए
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पारंपरिक राजस्थानी कपड़े
कठपुतलियां आमतौर पर लकड़ी से बनी होती हैं और उनकी बड़ी आंखें होती हैं, साथ ही उन्हें कपड़ों के साथ पारंपरिक राजस्थानी कपड़े पहनाए होते थे
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तारों से जुड़ी होती है
कठपुतलियां आमतौर पर एक लंबी स्कर्ट पहनी होती है, जिससे कठपुतली के हाथ ढक जाती है, साथ ही उनके सिर और अंगों से कई तार जुड़े रहते हैं, जिससे उन्हें नियंत्रित किया जाता है
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कलाकार पर्दे के पीछे
कठपुतली शो एक मंच पर किया जाता है, साथ ही इसके कलाकारों को छुपाने के लिए मंच के पीछे पर्दा लगा दिया जाता है, जिससे कठपुतली कलाकार अच्छे से कहानी दिखा पाते हैं
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कठपुतली शो या नाटक
कठपुतली शो या नाटक को स्थानीय नायकों, लोककथाओं औक सामाजिक मुद्दों की कहानियों के जरिए दर्शाते हैं, कठपुतली नाटक में सबसे लोकप्रिय कहानी नागौर के 17वीं शताब्दी के शासक अमर सिंह राठौड़ की है, जिन्होंने मुगल सम्राट शाहजहां को चुनौती दी और राजपूताना वीरता प्रतीक बन गए
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कठपुतली कलाकार
कठपुतली शो में ढोलक, हारमोनियम, सारंगी और मंजीरा के जरिए संगीत और गाने बजाए जाते थे। इसके साथ मिलकर कठपुतली कलाकार ऊंची आवाज में कहानियां कहते और सुनाते हैं
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लुप्त होती कठपुतली कला
आधुनिकीकरण और मनोरंजन के अन्य रूपों के कारण प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, जिस वजह से कठपुतली कला अब एक लुप्त होती जा रही है, विभिन्न संगठनों द्वारा इस कला को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जैसे कि उदयपुर में भारतीय लोक कला मंडल यह कठपुतली का एक म्यूजियम है