महिला आरक्षण बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास हो चुका है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। लेकिन, राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में महिला आरक्षण पहले से लागू है
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इस आरक्षण ने महिलाओं को राजनीति में आगे लाने में बड़ा रोल अदा किया है, आइए...इन महिलाओं के उदाहरण से जानते हैं
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उदयपुर के शोभागपुरा गांव की कविता जोशी महिला आरक्षण के कारण की राजनीति में आईं। उनके परिवार का राजनीति से कोई लेना देना नहीं था
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2015 में शोभागपुरा पंचायत की सीट महिला आरक्षित होने के बाद कविता ने ग्रामीणों की मांग पर हार्डवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ा और फिर सरपंच बनी
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बीटैक, एमटैक के बाद पीएचडी कर रही कविता को मोस्ट लिटरेट यंग सरपंच का अवार्ड मिला है। वे उड़ीसा और केरल में महिला सरपंच के नाते प्रदेश को रिप्रजेंट कर चुकी हैं। कविता भाजपा उदयपुर की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष हैं
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टोंक के सोडा गांव से सरपंच रहने वाले छवि राजावत देश की सबसे चर्चित महिला सरपंचों में से एक हैं। वे कौन बनेगा करोड़पति का हिस्सा भी बनी हैं
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छवि के राजनीति में आने की कहानी भी महिला आरक्षण से जुड़ी है। सोडा गांव की सीट महिला रिजर्व होने के बाद गांव के लोगों ने ही उन्हें चुनाव लड़ाने का फैसला किया था
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छवि ने 2010 में सोडा से सरंपच का चुनाव लड़ा और जीती। 2015 में जनरल सीट आने के बाद भी गांव के लोगों ने उन्हीं को दोबारा सरपंच का चुनाव लड़ाया
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छवि 2010 से 2020 तक सरपंच रहीं। छवि देश की पहली एमबीए सरपंच थी। मल्टिनेशनल कंपनी की जॉब छोड़ने के बाद छवि राजनीति में आईं थीं
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अजमेर की सरिता गैना आज भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता हैं। लेकिन, 2005 से पहले उनका और उनके परिवार का राजनीति में कोई वजूद नहीं था
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2005 में वार्ड में महिला रिजर्व सीट आई तो क्षेत्र के लोगों ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए कहा। इसके बाद सरिता ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की
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अजमेर में जिला प्रमुख की सीट ओबीसी महिला रिजर्व कोटे में आई तो उन्हें इसका फायदा मिला और वे जिला प्रमुख बन गईं
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2005 से 2010 तक वे जिला प्रमुख रहीं, 2014 में नसीराबाद सीट से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा, लेकिन सरिता हार गईं। वे महिला मोर्चा के प्रदेश मंत्री, महामंत्री जैसे पद पर रहीं और अब मोर्चा की प्रदेश प्रवक्ता हैं
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वंदना नोगिया ने अमजेर के वार्ड नंबर- 32 से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। एससी कोटे से महिला आरक्षित सीट होने के कारण परिवार ने वंदना को चुनाव लड़ने के लिए आगे बढ़ाया
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वंदना 2015 से 2020 तक जिला प्रमुख रहीं और भाजपा में प्रदेश मंत्री भी बनी। फिलहाल वंदना अजमेर दक्षिण सीट से विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के रूप में तैयारी कर रही हैं
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