जो व्यक्ति एक साल तक भोजन करते समय भगवान का ध्यान करेगा और मुंह से कुछ नहीं बोलेगा उसे एक हजार करोड़ वर्ष तक स्वर्ग लोक की प्राप्ति होगी.
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एक विद्यार्थी पूर्ण रूप से इन बातों का त्याग करे- काम, क्रोध, लोभ, स्वादिष्ट भोजन की अपेक्षा, शरीर का शृंगार, अत्याधिक जिज्ञासा, अधिक निद्रा, शरीर निर्वाह के लिए अत्याधिक प्रयास.
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वही सही में ब्राह्मण है जो केवल एक बार के भोजन से संतुष्ट रहे, जिस पर 16 संस्कार किए गए हों, जो अपनी पत्नी के साथ महीने में केवल एक दिन समागम करे. माहवारी समाप्त होने के दूसरे दिन.
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निम्न स्तर के लोगो से जिस व्यवसाय में संपर्क आता है, वह व्यवसाय ब्राह्मण को शूद्र बना देता है.
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वह ब्राह्मण जो दूसरों के कामों में अड़ंगे डालता है, जो दम्भी है, स्वार्थी है, धोखेबाज है, दूसरो से घृणा करता है और बोलते समय मुंह में मिठास और ह्रदय में क्रूरता रखता है, वह एक बिल्ली के समान है.
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एक ब्राह्मण जो तालाब को, कुएं को, टांके को, बगीचे को और मंदिर को नष्ट करता है, वह म्लेच्छ है.
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