अमर उजाला
Fri, 2 January 2026
आपकी सर्च, आवाज, फोटो और ऑनलाइन आदतें AI के लिए बेहद कीमती होती हैं। लेकिन आखिर AI इस डेटा से क्या सीखता है और इसका इस्तेमाल कैसे करता है? आइए समझते हैं।
AI इंसानों की तरह सोचकर नहीं, बल्कि डेटा देखकर सीखता है। जितना ज्यादा डेटा मिलता है, उतनी ही बेहतर उसकी समझ और जवाब देने की क्षमता बनती जाती है।
आप क्या सर्च करते हैं, क्या देखते हैं और क्या पसंद करते हैं, ये सब AI को यह समझने में मदद करता है कि यूजर क्या चाहता है और उसे बेहतर सुझाव कैसे दिए जाएं।
वॉइस कमांड, फेस रिकग्निशन और फोटो पहचान जैसे फीचर्स AI तभी सही से काम करता है, जब उसे अलग-अलग आवाजों और तस्वीरों का डेटा मिलता है।
Netflix की सिफारिशें हों या Google Maps का रूट, AI आपके पुराने डेटा के आधार पर ही आपको पर्सनल और आसान अनुभव देता है।
कई कंपनियां डेटा को एनक्रिप्ट और अनॉनिमस करने का दावा करती हैं, लेकिन यूजर को भी प्राइवेसी सेटिंग्स और परमिशन को समझदारी से कंट्रोल करना जरूरी है।
अगर AI को पर्याप्त डेटा न मिले, तो वह कम सटीक होगा। यानी फीचर्स धीमे, सुझाव कमजोर और अनुभव कम स्मार्ट हो सकता है।
अपने साथ टेलीफोन रखते हैं पुतिन, आखिर क्यों स्मार्टफोन नहीं चलाते?