फास्टैग की जगह लेने वाला 'GNSS' तकनीक क्या है?

अमर उजाला

Tue, 24 March 2026

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भारत में टोल कलेक्शन को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइन सिस्टम) आधारित टोलिंग तकनीक को धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है।  
 

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यह तकनीक वर्तमान रेडियो फ्रीक्वेंसी (RFID) आधारित फास्टैग से काफी अलग और एडवांस है।
 

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आइए जानते हैं GNSS तकनीक कैसे काम करती है?

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सैटेलाइट ट्रैकिंग

इस सिस्टम में आपकी गाड़ी में एक ओबीयू या जीपीएस डिवाइस लगा होता है। जैसे ही गाड़ी हाईवे पर चलती है, सैटेलाइट के जरिए उसकी सटीक लोकेशन ट्रैक की जाती है।
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दूरी के आधार पर टैक्स

वर्तमान सिस्टम में आप जैसे ही टोल प्लाजा क्रॉस करते हैं, एक निश्चित राशि कट जाती है। लेकिन GNSS में आप हाईवे पर जितने किलोमीटर चलेंगे, केवल उतने का ही टोल कटेगा।
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बिना बैरियर का सफर

इसके लिए सड़कों पर फिजिकल टोल प्लाजा या बैरियर की जरूरत नहीं होगी। गाड़ियां बिना रुके अपनी रफ्तार में चलती रहेंगी और वर्चुअल गेट्स के जरिए टोल अपने आप कट जाएगा।

 
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