'छोटी काशी'... यहां स्थापित है अद्भुत शिवलिंग, त्रेतायुग से जुड़ी है मान्यता

अमर उजाला

Wed, 6 March 2024

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लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ का पौराणिक शिव मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। 

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महाशिवरात्रि पर गोला गोकर्णनाथ में आस्था का सैलाब उमड़ता है। इसके मद्देनजर तैयारियां शुरू हो गई हैं। 

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गोला गोकर्णनाथ मंदिर में भगवान शिव का अद्भुत श्रृंगार होता है। श्रृंगार दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त उमड़ते हैं। 

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मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में रावण की तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने शिवलिंग का आकार लिया। 

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भगवान शिव ने रावण से कहा कि उन्हें लंका लेकर चले। अगर रास्ते में कहीं भी रखा, तो वहीं स्थापित हो जाएंगे।
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रावण शिवलिंग को लेकर लंका के लिए चला। जब रावण गोला गोकर्णनाथ में पहुंचा तो उसे लघुशंका का अनुभव हुआ। 

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रावण एक चरवाहे को इस हिदायत के साथ शिवलिंग देकर चला गया कि वह शिवलिंग भूमि पर नहीं रखेगा। 

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काफी देर तक वापस न आने पर चरवाहे ने शिवलिंग को भूमि पर रख दिया। वापस आने पर रावण शिवलिंग को उठा नहीं सका।

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गुस्से में रावण ने अपने अंगूठे से शिवलिंग को भूमि में दबा दिया, जिससे उसमें गाय के कान (गौ-कर्ण) जैसा निशान बन गया। 

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गोला गोकर्णनाथ शिवलिंग का आकार गाय के कान की तरह होने के कारण शिवलिंग का नाम गोकर्णनाथ पड़ा। 

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गोला रेलवे स्टेशन से पौराणिक शिव मंदिर की दूरी 390 मीटर है। शिवमंदिर के तीन द्वार हैं।

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धरातल से गर्भ गृह की गहराई नौ फीट है। अष्टकोणीय गर्भगृह में शिवलिंग डेढ़ फीट गहराई में स्थापित है। 
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