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Philippines Earthquake: फिलीपींस में आए विनाशकारी भूकंप से करीब 20 हजार लोग बेघर; अब तक 37 की मौत, चार लापता
वर्ड डेस्क, अमर उजाला, मनीला
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 09 Jun 2026 03:36 PM IST
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सार
साल 1976 में आए विनाशकारी भूकंप की त्रासदी के बाद एक बार फिर फिलीपींस भूकंप के झटकों से थर्राया। बीते दिन (8 जून) को 7.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें 37 लोग मारे गए जबकि तकरीबन 20,000 लोग बेघर हो गए हैं। अभी भी चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस दौरान समुद्र में उठी तेज लहरों ने भी खूब तबाही मचाई। जानिए इस प्राकृतिक आपदा के बाद अब तक फिलीपींस में क्या-क्या हुआ...
फिलीपींस में भूकंप से तबाही
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
फिलीपींस की सबसे ज्यादा आबादी वाले द्वीप में दूसरे नंबर पर आने वाले मिंडानाओ के पास आए भूकंप ने पूरे शहर को तहस-नहस कर दिया है। सोमवार को आए भूकंप में जहां 37 लोगों की मौत हो गई वहीं लगभग 500 लोग घायल हैं। भूकंप के बाद रही सही कसर समुद्र में उठने वाली लहरों ने पूरी कर दी, जानकारी के मुताबिक, तेज समुद्री लहरों से तट के आस-पास के घर पूरी तरह नष्ट हो गए।
फिलहाल, इलाके में लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के एक दिन बाद यानी आज मंगलवार को बचाव दल धराशायी हुई इमारतों में जीवन तलाशते नजर आए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभी भी चार लोग ही लापता हैं। सिविल डिफेंस ऑफिस के अधिकारियों का मानना है कि बुरी तरह क्षतिग्रस्त इमारतों की ठीक तरह से जांच की जानी चाहिए, जिससे जीवित बचे लोगों की या हताहत हुए लोगों का पता लगाया जा सके।
एक झटके में बेघर हुए 20,000 से ज्यादा लोग
मिंडानाओ के पास आए इस भूकंप में सरकारी इमारतों और स्कूलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा से प्रभावित अधिकतर लोगों को इमरजेंसी शेल्टर में भेजा गया है। बताया जा रहा है कि फिलीपींस में ज्वार के स्तर से 1.4 मीटर यानी लगभग 4.6 फीट ऊंची लहरें मापी गईं। सुनामी जैसी स्थिति के कारण एक तटीय गांव में बने कई कच्चे घरों को नुकसान पहुंचा है। समुद्र से उठी छोटी लहरों का असर इंडोनेशिया, पलाऊ और यहां तक कि दक्षिणी जापान के तटों तक भी देखने को मिला है।
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मृतकों का आंकड़ा बढ़ा, अब तक 37 मौतों की पुष्टि
भूकंप की इस भारी तबाही में जनरल सैंटोस भी शामिल रहा। ये सात लाख से ज्यादा आबादी वाला तटीय शहर है और देश की 'टूना राजधानी' के रूप में जाना जाता है। इस जगह पर काफी संख्या में इमारतें गिरीं, जिससे यहां मौत का आंकड़ा 13 तक पहुंच गया है। सिविल डिफेंस ऑफिस के राफेलिटो एलेजांद्रो की मानें तो सरंगानी प्रांत में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर मौतें भूस्खलन के कारण हुई बताई जा रही हैं। आपदा-प्रबंधन के अनुसार अन्य मौतें दक्षिणी राज्यों- साउथ कोटाबाटो और दावाओ ऑक्सीडेंटल और बालुट द्वीप पर हुई हैं।
नुकसान का आंकलन करने में जुटे अधिकारी
सरकार के अनुसार, इस आपदा के कारण लगभग 2000 मकान और 117 सरकारी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके साथ ही जनरल सैंटोस में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद रहा जिस कारण से 63 घरेलू उड़ानें भी रद्द करनी पड़ गईं। शुरुआती आंकड़ों में भारी नुकसान की संभावना जताई जा रही है।
गर्मियों की छुट्टी के बाद पहले दिन स्कूल गए थे छात्र
ये भूकंप तब आया जब गर्मी की छुट्टियों के बाद कक्षाएं पहले दिन ही शुरू हुई थी। अधिकारियों ने भूकंप के बाद आने वाले झटकों (आफ्टरशॉक) की चेतावनी देते हुए कहा कि जिन इमारतों में दरारें आ गई हैं, भूकंप के बाद आने वाले संभावित झटकों के कारण वे गिर सकती हैं। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप से प्रभावित हुए इलाकों में तकरीबन 6,000 सरकारी स्कूल की इमारतों की जांच की जाएगी। इसके बाद ही कक्षाएं फिर से शुरू की जा सकेंगी। सिविल डिफेंस के अधिकारी अलेजांद्रो ने कहा, 'हम स्कूलों को तुरंत खोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। हमें इमारतों की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी'।
ये भी पढ़ें: POJK Protests: PAK फिर बेनकाब, मुजफ्फराबाद में प्रदर्शनकारियों का दमन; 50 ब्रिटिश सांसदों ने भी जताई चिंता
1976 के बाद आया सबसे तेज भूकंप
बीते दिन आए भूकंप का केंद्र समुद्र में 33 किमी की गहराई पर था, जो सरंगानी राज्य के मासिम से तकरीबन 32 किमी दक्षिण-पश्चिम की तरफ था। फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी के डायरेक्टर टेरेसिटो बाकोलकोल की मानें तो यह भूकंप कोटाबाटो ट्रेंच में हुई हलचल के कारण आया था। यह भूकंप साल 1976 में आए 8.1 की तीव्रता से आए भूकंप के बाद दूसरा सबसे तेज झटका था। टेरेसिटो बाकोलकोल के अनुसार साल 1976 में आए भूकंप में आठ से 10 मीटर की लहरें उठी थीं। इस दौरान लगभग 8000 लोग मारे गए थे।
फिलीपींस की मदद के लिए साथ आए कई देश
फिलीपींस के सहयोग में अमेरिका ने कहा कि वह मनीला के साथ मिलकर काम कर रहा है। उनका कहना है कि वे फिलीपींस के राहत कार्यों में मदद के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही फ्रांस, जापान और न्यूजीलैंड ने भी फिलीपींस की मदद करने की बात कही है।
फिलहाल, इलाके में लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के एक दिन बाद यानी आज मंगलवार को बचाव दल धराशायी हुई इमारतों में जीवन तलाशते नजर आए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभी भी चार लोग ही लापता हैं। सिविल डिफेंस ऑफिस के अधिकारियों का मानना है कि बुरी तरह क्षतिग्रस्त इमारतों की ठीक तरह से जांच की जानी चाहिए, जिससे जीवित बचे लोगों की या हताहत हुए लोगों का पता लगाया जा सके।
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एक झटके में बेघर हुए 20,000 से ज्यादा लोग
मिंडानाओ के पास आए इस भूकंप में सरकारी इमारतों और स्कूलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा से प्रभावित अधिकतर लोगों को इमरजेंसी शेल्टर में भेजा गया है। बताया जा रहा है कि फिलीपींस में ज्वार के स्तर से 1.4 मीटर यानी लगभग 4.6 फीट ऊंची लहरें मापी गईं। सुनामी जैसी स्थिति के कारण एक तटीय गांव में बने कई कच्चे घरों को नुकसान पहुंचा है। समुद्र से उठी छोटी लहरों का असर इंडोनेशिया, पलाऊ और यहां तक कि दक्षिणी जापान के तटों तक भी देखने को मिला है।
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मृतकों का आंकड़ा बढ़ा, अब तक 37 मौतों की पुष्टि
भूकंप की इस भारी तबाही में जनरल सैंटोस भी शामिल रहा। ये सात लाख से ज्यादा आबादी वाला तटीय शहर है और देश की 'टूना राजधानी' के रूप में जाना जाता है। इस जगह पर काफी संख्या में इमारतें गिरीं, जिससे यहां मौत का आंकड़ा 13 तक पहुंच गया है। सिविल डिफेंस ऑफिस के राफेलिटो एलेजांद्रो की मानें तो सरंगानी प्रांत में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। इनमें से अधिकतर मौतें भूस्खलन के कारण हुई बताई जा रही हैं। आपदा-प्रबंधन के अनुसार अन्य मौतें दक्षिणी राज्यों- साउथ कोटाबाटो और दावाओ ऑक्सीडेंटल और बालुट द्वीप पर हुई हैं।
नुकसान का आंकलन करने में जुटे अधिकारी
सरकार के अनुसार, इस आपदा के कारण लगभग 2000 मकान और 117 सरकारी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके साथ ही जनरल सैंटोस में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद रहा जिस कारण से 63 घरेलू उड़ानें भी रद्द करनी पड़ गईं। शुरुआती आंकड़ों में भारी नुकसान की संभावना जताई जा रही है।
गर्मियों की छुट्टी के बाद पहले दिन स्कूल गए थे छात्र
ये भूकंप तब आया जब गर्मी की छुट्टियों के बाद कक्षाएं पहले दिन ही शुरू हुई थी। अधिकारियों ने भूकंप के बाद आने वाले झटकों (आफ्टरशॉक) की चेतावनी देते हुए कहा कि जिन इमारतों में दरारें आ गई हैं, भूकंप के बाद आने वाले संभावित झटकों के कारण वे गिर सकती हैं। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप से प्रभावित हुए इलाकों में तकरीबन 6,000 सरकारी स्कूल की इमारतों की जांच की जाएगी। इसके बाद ही कक्षाएं फिर से शुरू की जा सकेंगी। सिविल डिफेंस के अधिकारी अलेजांद्रो ने कहा, 'हम स्कूलों को तुरंत खोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। हमें इमारतों की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी'।
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1976 के बाद आया सबसे तेज भूकंप
बीते दिन आए भूकंप का केंद्र समुद्र में 33 किमी की गहराई पर था, जो सरंगानी राज्य के मासिम से तकरीबन 32 किमी दक्षिण-पश्चिम की तरफ था। फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी के डायरेक्टर टेरेसिटो बाकोलकोल की मानें तो यह भूकंप कोटाबाटो ट्रेंच में हुई हलचल के कारण आया था। यह भूकंप साल 1976 में आए 8.1 की तीव्रता से आए भूकंप के बाद दूसरा सबसे तेज झटका था। टेरेसिटो बाकोलकोल के अनुसार साल 1976 में आए भूकंप में आठ से 10 मीटर की लहरें उठी थीं। इस दौरान लगभग 8000 लोग मारे गए थे।
फिलीपींस की मदद के लिए साथ आए कई देश
फिलीपींस के सहयोग में अमेरिका ने कहा कि वह मनीला के साथ मिलकर काम कर रहा है। उनका कहना है कि वे फिलीपींस के राहत कार्यों में मदद के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही फ्रांस, जापान और न्यूजीलैंड ने भी फिलीपींस की मदद करने की बात कही है।