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Britain: जानलेवा साबित हुई है ब्रिटेन में सरकार की कमखर्ची बरतने की नीति

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 07 Oct 2022 05:58 PM IST
सार

Britain: ब्रिटेन के ट्रेड यूनियन- यूनिसन की महासचिव क्रिस्टीना मैक्केनी ने कहा- ‘कमखर्ची की नीति कभी समाधान नहीं हो सकती। यह एक नाकाम प्रयोग है, जिसके भयानक परिणाम हुए हैं और जिसकी वजह से लोगों की जान गई है।’

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britain trade union unison - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

ब्रिटेन में सार्वजिनक सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च घटाने की सरकार की नीति जानलेवा साबित हुई है। हाल के वर्षों में इस नीति के कारण तीन लाख 30 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई है। ये बात एक ताजा अध्ययन से सामने आई है।

खास कर 2008 की आर्थिक मंदी के बाद बनी स्थितियों में ब्रिटेन में ऑस्टेरिटी यानी कमखर्ची की नीति लागू की गई। अध्ययनकर्ताओं ने 2012 से 2019 के बीच इस नीति के हुए परिणामों का अध्ययन किया। इससे सामने आया कि इस दौरान हजारों लोग आमदनी घटने, खराब सेहत, पौष्टिक भोजन ना मिलने, उचित आवास ना होने, और सामाजिक अलगाव के कारण मर गए। 2010 से शुरू हुई कमखर्ची की नीति के तहत सरकारों ने सार्वजनिक खर्च में अरबों पाउंड की कटौती की है। इस पूरी अवधि में ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी सत्ता में रही है।

ताजा अध्ययन की रिपोर्ट जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में छपी है। इसमें कहा गया है कि इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड में आठ साल की अवधि में (अध्ययन की अवधि) 3,34,327 लोगों की अतिरिक्त मृत्यु हुई। ये अध्ययन रिपोर्ट उस समय जारी हुई है, जब लिज ट्रस के नेतृत्व वाली मौजूदा कंजरवेटिव सरकार ने सार्वजनिक खर्चों में और कटौती का संकेत दिया है। इसके तहत कामकाजी उम्र के लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती का भी इरादा है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होंगे।

अध्ययन में कई संस्थान शामिल हुए, जिनका नेतृत्व ग्लासगो यूनिवर्सिटी और ग्लासगो सेंटर फॉर पॉपुलेशन हेल्थ ने किया। अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कमखर्ची की नीतियों को तुरंत वापस लेने की जरूरत है। साथ ही ऐसी नीतियां लागू की जानी चाहिए, जिससे समाज के कमजोर तबकों को संरक्षण मिल सके। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर गैरी मैकॉर्टनी ने कहा है- जिस समय ब्रिटिश सरकार मौजूदा और भावी आर्थिक दिशा पर चर्चा कर रही है, उसे सामाजिक सुरक्षा में भारी कटौती के हुए विनाशकारी प्रभावों से सीख लेनी चाहिए। इन कटौतियों का पूरे ब्रिटेन में लोगों की सेहत पर जो खराब असर हुआ, उससे उसे सबक लेना चाहिए।

यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो में प्रोफेसर रुथ डुनडास ने कहा- इस अध्ययन ने दिखाया है कि ब्रिटेन में जितने लोगों की मौत कोविड-19 महामारी से हुई, उससे कहीं ज्यादा लोग ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीति के कारण मरे हैं। रिपोर्ट तैयार करने में शामिल रहे डुनडास सामाजिक संक्रमण विज्ञान के प्रोफेसर हैं।

अध्ययन के दौरान देखा गया कि इंग्लैंड के 20 सर्वाधिक वंचित इलाकों में रहने वाली महिलाओं की मृत्यु दर में इन नीतियों पर अमल के बाद तीन फीसदी की बढ़ोतरी हुई। उधर स्कॉटलैंड के पांच सर्वाधिक वंचित इलाकों में असामयिक मौतों में 6 से 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई। विश्लेषकों के मुताबिक इसके पहले भी कुछ अध्ययनों से यह सामने आ चुका है कि स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल व्यवस्था में खर्च घटाने की सरकारी नीतियों के कारण इंग्लैंड में अतिरिक्त मौतें हुई हैं।

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ताजा रिपोर्ट जारी होने के बाद ब्रिटेन के ट्रेड यूनियन- यूनिसन की महासचिव क्रिस्टीना मैक्केनी ने कहा- ‘कमखर्ची की नीति कभी समाधान नहीं हो सकती। यह एक नाकाम प्रयोग है, जिसके भयानक परिणाम हुए हैं और जिसकी वजह से लोगों की जान गई है।’

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