उइगर मुस्लिम की सजा: गुप्तांग में करंट देने से लेकर हथौड़े से पैर तोड़ने तक, चीनी पुलिसकर्मी की जुबानी, टॉर्चर की कहानी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 17 Oct 2021 03:51 PM IST

सार

चीनी पुलिसकर्मी के मुताबिक, सुरक्षाबल के जवान शिनजियांग में बंद रखे गए जिन भी उइगर मुस्लिमों को पकड़ कर लाते हैं, उन्हें टॉर्चर के लिए कुर्सी से बांध कर रखा जाता है।
चीन के शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के साथ की जा रही बर्बरता का चीन के ही पुलिसकर्मी ने ब्योरा दिया है।
चीन के शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के साथ की जा रही बर्बरता का चीन के ही पुलिसकर्मी ने ब्योरा दिया है। - फोटो : Social Media
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विस्तार

चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तानाशाही नेतृत्व में मानवाधिकार उल्लंघनों के मामले लगातार बाहर आते रहे हैं। खासकर चीन के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित शिनजियांग से, जहां लाखों की संख्या में रहने वाले उइगर मुस्लिमों पर सालों से जुर्म किए जा रहे हैं। चीनी शासन की इन ज्यादतियों से भागे कई पीड़ित पहले ही अपने और साथी उइगर मुस्लिमों पर किए जा रहे जुर्मों का ब्योरा पेश कर चुके हैं। हालांकि, अब चीन के एक पुलिसकर्मी ने खुद उइगरों को दिए जाने वाले भयानक टॉर्चर का खुलासा किया है। 
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ब्रिटिश मीडिया कंपनी 'द मेल' को दिए इंटरव्यू में इस चीनी पुलिसकर्मी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिसवाले की पहचान और उसके इंटरव्यू की जगह के बारे में जानकारी उजागर नहीं की गई, हालांकि इस अधिकारी ने कई ऐसे दस्तावेज और सबूत सौंपे हैं, जिनसे चीन में उइगर मुस्लिमों पर जुर्म के तरीके साफ हो जाते हैं। 

इस चीनी पुलिसकर्मी के मुताबिक, सुरक्षाबल के जवान शिनजियांग में बंद रखे गए जिन भी उइगर मुस्लिमों को पकड़ कर लाते हैं, उन्हें टॉर्चर के लिए कुर्सी से बांध कर रखा जाता है। उन्हें टॉर्चर देने की शुरुआत होती है मारपीट से। इंटरव्यू में जियांग नाम से बुलाए गए इस पुलिसकर्मी ने बताया कि शुरुआत में उइगरों को एक बंद कमरे में बांध कर रखा जाता है, जहां पुलिस के जवान उन्हें लात-घूंसों से पीटते हैं और उनकी नंगी पीठ पर कोड़े बरसाते हैं। ऐसे ज्यादातर टॉर्चर में लोगों की जान तक चली जाती है। 

इंटरव्यू लेने वाले रिपोर्टर के मुताबिक, चीन के इस पूर्व पुलिसकर्मी ने उसे टॉर्चर के तरीकों का प्रदर्शन कर के भी दिखाया। उसने बताया कि ज्यादातर मामलों में पिटाई से लोगों की आंखों की रोशनी तक चली जाती है। टॉर्चर का अगला चरण होता है पीड़ितों को नींद न लेने देने का। हल्की झपकी पर भी उन्हें इतना मारा जाता है कि वे होश गंवा देते हैं और फिर उन्हें होश में लाकर दोबारा पीटा जाता है। कई पुलिसवाले हथौड़े लेकर पीड़ितों के पैर तक तोड़ देते हैं, जिससे उन्हें अस्थायी तौर पर दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है।

जियांग ने बताया कि तीसरे चरण के टॉर्चर में उइगरों के गुप्तांगों में करंट लगा दिया जाता है। महिलाओं के लिए टॉर्चर का एक तरीका यह है कि उनके हाथों में हथकड़ी लगा दी जाती है और फिर उनके हाथों को बार-बार मेज पर पटका जाता है। कुछ ही मिनटों बाद उनके हाथ खून से सने होते हैं। इस व्हिसलब्लोअर ने बताया कि उसने कई 14 साल के बच्चों को भी इन टॉर्चर का शिकार होते हुए देखा है। खास तौर पर उइगर बच्चों को जिन्हें सिर्फ इसलिए सजा दी जाती है, क्योंकि वे मुस्लिम हैं। 

जिस पुलिसकर्मी ने यह खुलासे किए हैं, उसकी उम्र महज 39 साल बताई गई है और वह चीन के पुलिसकर्मियों के परिवार से आता है। द मेल के मुताबिक, इस पुलिसवाले ने उन्हें जो सबूत सौंपे हैं, उसमें कई फोटो, पुलिस के टॉर्चर से जुड़े दस्तावेज और 2015 का राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अधिकारियों को दिया गया आदेश भी शामिल है, जिसमें शी ने उइगरों पर निगरानी रखने के साथ उनकी जांच करने के लिए भी कहा था।

छोटी-छोटी शिकायतों पर भी गिरफ्तार हो जाते हैं उइगर

जियांग ने बताया कि अगर कोई उइगर अपनी गरीबी या शिनजियांग से बाहर जाने की भी अपील करता है, तो उसकी गिरफ्तारी हो जाती है। उइगर मुस्लिमों को रोकने के लिए शहर में हर 300 से 500 कदमों पर एक पुलिस चेकपॉइंट बनाया गया है और इस पर लगातार उन्हें नियम-कायदे से चलने और राष्ट्र की एकता बनाए रखने के संदेश दिए जाते हैं। यहां तक कि अगर तीन उइगर एक साथ घूमते दिखते हैं, तो पुलिस उनसे अलग-अलग जाने को कहती है और जिनकी भी बढ़ी दाढ़ी दिखती है, उन्हें आपराधिक जांच का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर इस्लामिक वीडियो भेजने पर भी युवाओं को 10-10 साल तक जेल में रखा जाता है। 

चीन से इस्लाम को खत्म करने की साजिश

इस पुलिसकर्मी ने बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का इस्लाम के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान इतना विस्तृत है कि शासन इससे लोगों को नियंत्रित करना चाहता है। सरकार इस्लाम खत्म करने के साथ उनकी परंपराओं और मान्यताओं को भी मिटा देना चाहती है और उइगरों की पहचान भी बदलना चाहती है। 
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