ड्रैगन का शिकंजा: चीन से फास्ट रेल बनवाने के चक्कर में कर्ज के जाल में फंस गया इंडोनेशिया

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 20 Oct 2021 05:57 PM IST

सार

फास्ट रेल परियोजना पर काम 2015 में शुरू हुई था। उसके एक साल पहले जोको विडोडो राष्ट्रपति चुने गए थे। विडोडो सरकार ने इस परियोजना को लेकर खूब उत्साह दिखाया। 143 किलोमीटर की इस रेल परियोजना पर 6.07 अरब डॉलर खर्च होना था। लेकिन अब तक ये रकम बढ़ कर आठ अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है...
चीन ने इंडोनेशिया हाई-स्पीड रेलवे का निर्माण शुरू किया
चीन ने इंडोनेशिया हाई-स्पीड रेलवे का निर्माण शुरू किया - फोटो : cctv
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विस्तार

इंडोनेशिया सरकार को अपने खजाने से जकार्ता-बांडुंग फास्ट रेल परियोजना पर बढ़ी लागत को चुकाना पड़ेगा। जबकि सरकार ने पहले कहा था कि इस प्रोजेक्ट का कोई बोझ सरकारी बजट पर नहीं आएगा। इंडोनेशिया में ये परियोजना चीन बना रहा है। भूमि अधिग्रहण से जुड़ी और अन्य दिक्कतों के कारण परियोजना के पूरा होने में काफी देर हो चुकी है।
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फास्ट रेल परियोजना पर काम 2015 में शुरू हुई था। उसके एक साल पहले जोको विडोडो राष्ट्रपति चुने गए थे। विडोडो सरकार ने इस परियोजना को लेकर खूब उत्साह दिखाया। 143 किलोमीटर की इस रेल परियोजना पर 6.07 अरब डॉलर खर्च होना था। लेकिन अब तक ये रकम बढ़ कर आठ अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है। पहले के कार्यक्रम के मुताबिक इस परियोजना को 2020 में तैयार हो जाना था। लेकिन अब नई समयसीमा 2022 रखी गई है। परियोजना चीन के बहुचर्चित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा है। इसे चीन से मिले 4.5 अरब डॉलर के कर्ज से बनाया जाना था।


अमेरिका में वर्जीनिया स्थित रिसर्च संस्था एडडेटा की एक हालिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बीआरआई के कारण कई देश ऐसे कर्ज में डूब गए हैं, जिनके बारे में पहले सूचना नहीं दी गई थी। उन देशों में इंडोनेशिया भी शामिल है। एडडेटा का कहना है कि चीन ने साल 2000 से 2017 के बीच इंडोनेशिया को 34.9 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता देने का वादा किया था। ये रकम सरकारी विकास सहायता या अन्य सरकारी सहायता के रूप में मिली।

इंडोनेशिया पर अब चीन का 4.95 अरब डॉलर का सरकारी कर्ज

एडडेटा के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इंडोनेशिया पर अब चीन का 4.95 अरब डॉलर का सरकारी कर्ज है। इसके अलावा 17.28 अरब डॉलर का ऐसा कर्ज है, जिसके बारे में सार्वजनिक सूचना नहीं दी गई है। ये कर्ज सरकारी कंपनियों और दूसरे सरकारी उद्यमों के ऊपर है। इसका मतलब यह हुआ कि चीन का इंडोनेशिया पर कुल जितना कर्ज है, उसका 78 फीसदी हिस्सा इंडोनेशिया सरकार के ऊपर है। इंडोनेशिया के अखबार कोरान टेम्पो ने हाल में इस विषय पर एक संपादकीय लिखा। उसमें चीनी कर्ज को ऐसा बम बताया गया, जो कभी भी फट सकता है। अखबार ने कहा कि इस कर्ज का असर इंडोनेशिया के भावी विकास पर पड़ेगा।

एडडेटा का कहना है कि चीन के कर्ज की शर्तों के मुताबिक इस ऋण पर 4.06 फीसदी की दर से ब्याज लगता है। इसके मैच्योर होने की अवधि औसतन 15 साल होती है, जिसके ऊपर दो साल सात महीने का ग्रेस पीरियड (अनुकंपा अवधि) होती है। जबकि इसकी तुलना में ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के सदस्य देश जो कर्ज देते हैं, उन पर 1.1 फीसदी की दर से ब्याज देना होता है, और उसकी की मैच्योरिटी अवधि 28 साल होती है।

इंडोनेशियाई मीडिया के मुताबिक फास्ट रेल परियोजना का 78 फीसदी हिस्सा बन कर तैयार हो गया है। लेकिन अभी इसमें 13 और सुरंगें बननी हैं। उनके लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी में देर हो रही है। बताया जाता है कि परियोजना तैयार होने के बाद इस रेल सेवा के जरिए 32 हजार यात्री रोज सफर करेंगे।
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