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Nepal: नेपाल के आम चुनाव में कमजोर विकेट पर है ओली की पार्टी, गठबंधन बना चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sun, 14 Aug 2022 02:35 PM IST
सार

पार्टी की मुश्किल उसके कुछ पूर्व सदस्य ही हैं। पिछले साल अगस्त में पार्टी का एक गुट यूएमएल से अलग हो गया था। उस गुट से जुड़े नेताओं ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) नाम से अलग पार्टी बनाई।

केपी शर्मा ओली
केपी शर्मा ओली - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

पांच दलों के सत्ताधारी गठबंधन के एकजुट रहने के कारण अब नेपाल के अगले आम चुनाव में प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) की चुनौतियां गंभीर हो गई हैं। विश्लेषकों ने राय जताई है कि मई में हुए स्थानीय चुनावों से ये जाहिर हो गया था कि अगर सत्ताधारी गठबंधन एकजुट रहा, तो पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाले यूएमएल के लिए अगला चुनाव एक मुश्किल चुनौती बन जाएगा। 



इसके बावजूद अपने सार्वजनिक बयानों से यूएमएल के नेता यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव जीतने में सक्षम है। काठमांडू में हुए पार्टी की एक विशेष प्रांतीय समिति की बैठक को संबोधित करते हुए केपी शर्मा ओली ने कहा कि अगर पार्टी सदस्यों ने संगठित और नियोजित ढंग से काम किया, तो यूएमएल बहुमत हासिल कर लेगी। लेकिन विशेषज्ञों ने इसे पार्टी का मनोबल बढ़ाने की कोशिश ही माना है। 


पार्टी की मुश्किल उसके कुछ पूर्व सदस्य ही हैं। पिछले साल अगस्त में पार्टी का एक गुट यूएमएल से अलग हो गया था। उस गुट से जुड़े नेताओं ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) नाम से अलग पार्टी बनाई। हालांकि स्थानीय चुनावों में ये गुट अपने लिए कोई कामयाबी हासिल नहीं कर सका, लेकिन उसके वोट काटने से यूएमएल को खासा नुकसान हुआ। राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र महाराजन ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘जिन चुनाव क्षेत्रों में यूएमएल को पूर्व चुनावों में पहले छोटे अंतर से जीत मिली थी, वह यूनिफाइड सोशलिस्ट उसका खेल बिगाड़ सकती है।’

स्थानीय चुनावों में यूएमएल का प्रदर्शन 2017 के चुनावों की तुलना में काफी कमजोर रहा। 2017 में पार्टी 294 इकाइयों में जीत कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। इस वर्ष वह 206 सीटें ही जीत पाई, जबकि 2017 में 266 इकाइयों में विजयी रहने वाली नेपाली कांग्रेस ने 329 इकाइयां जीत ली। मई के स्थानीय चुनावों में यूएमएल को 33.03 प्रतिशत वोट मिले, जबकि नेपाली कांग्रेस 34.28 प्रतिशत वोट ले गई। 

हालांकि ये आंकड़े यूएमएल के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं, लेकिन पार्टी के प्रचार विभाग के उप प्रमुख विष्णु रिजाल ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘हम अपने दम पर बहुमत पाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। हमने अब तक किसी दल से गठबंधन की कोशिश नहीं की है। हालांकि दूसरी पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता अगर यूएमएल में आना चाहें, तो उनके लिए दरवाजे खुले हुए हैँ।’

पिछले आम चुनाव में प्रतिनिधि सभा की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों में से यूएमएल ने 80 सीटें जीती थीं। आनुपातिक प्रतिनिधित्व से उसे 41 और सीटें मिली थीँ। दूसरी तरफ नेपाली कांग्रेस को प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 23 सीटें मिली थीं, जबकि आनुपातिक प्रतिनधित्व के तहत उसे 40 सीटें मिली। लेकिन तब पुष्प कमल दहल और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टियां भी यूएमएल का हिस्सा थीं। अब वे ये दोनों पार्टियां सत्ताधारी गठबंधन में शामिल हैं। 

इसके मद्देनजर राजेंद्र महाराजन ने कहा- ‘यूएमएल के नेता जो गैर-जरूरी आत्म विश्वास दिखा रहे हैं, वह असल में उनकी कमजोरी की निशानी है।’ एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक सी के लाल ने कहा है- ‘यूएमएल में केपी शर्मा ओली के अलावा अब पूरे देश में वोट जुटा सकने वाला कोई नेता नहीं है। माधव कुमार नेपाल और झलानाथ खनाल जैसे नेता उससे अलग हो चुके हैँ। इसका असर पड़ेगा।’ नेपाल में संसदीय और प्रांतीय चुनावों के लिए मतदान अगले 20 नवंबर को होगा। 

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