इमरान खान के कार्यकाल में विदेश और रक्षा नीतियों पर बरकरार पाक सेना का प्रभाव: अमेरिकी रिपोर्ट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Thu, 29 Aug 2019 10:31 AM IST

सार

  • पाकिस्तान में सेना का प्रभाव देश की विदेश और रक्षा से संबंधित नीतियों पर बरकरार है। 
  • ये बात अमेरिकी संसद की एक रिपोर्ट में कही गई है। 
  • अमेरिकी सांसदों के लिए इस रिपोर्ट को सीआरएस ने तैयार किया है। 
  • विश्लेषकों का कहना है कि नवाज शरीफ को हटाने के मकसद से चुनाव के दौरान घरेलू राजनीति में हेरफेर हुई।
पाक प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा
पाक प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा - फोटो : social media
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

पाकिस्तान में इमरान खान के कार्यकाल के दौरान भी सेना का प्रभाव देश की विदेश और रक्षा से संबंधित नीतियों पर बरकरार रहा है। ये बात अमेरिकी संसद की एक रिपोर्ट में कही गई है। अमेरिकी सांसदों के लिए इस रिपोर्ट को द्विदलीय कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने तैयार किया है।
विज्ञापन


इस रिपोर्ट में कहा गया है कि खान को शासन का कोई पुराना अनुभव नहीं है, जिससे वह अपने कार्यभार को बेहतरी से संभाल पाते। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की सुरक्षा सेवाओं ने नवाज शरीफ को हटाने के मकसद से चुनाव के दौरान घरेलू राजनीति में हेरफेर की थी।


रिपोर्ट में लिखा है कि खान के "नया पाकिस्तान" की सोच युवाओं, शहरी और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को लुभाती है। उनकी यह सोच भ्रष्टाचार विरोधी, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने वाले एक "कल्याणकारी देश" के निर्माण पर जोर देती है, लेकिन देश में गंभीर वित्तीय संकट और विदेश से और उधार लेने की आवश्यकता के कारण उनके प्रयास रंग नहीं ला रहे हैं। 

अधिकतर विश्लेषकों को लगता है कि पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान विदेश और सुरक्षा नीतियों पर लगातार हावी रहा है। सीआरएस अमेरिकी कांग्रेस की एक स्वतंत्र रिसर्च विंग है, जो सांसदों के लिए विभिन्न मुद्दों पर समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करता है। इसे अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं माना जाता है।

सीआरएस ने कहा कि कई विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की सुरक्षा सेवाओं ने चुनावों से पहले और चुनावों के दौरान घरेलू राजनीति में हेरफेर की थी। उनका प्रमुख उद्देश्य नवाज शरीफ को सत्ता से हटाना और उनकी पार्टी को कमजोर करना था। ये भी देखा गया कि कथित रूप से एक "सैन्य-सांठगांठ" खान की पार्टी के पक्ष में आया।
 
सीआरएस का कहना है, "चुनाव पर्यवेक्षक और मानवाधिकार समूह कभी-कभी लोकतांत्रिक मानदंडों के 'गंभीर' दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए बयान जारी करते हैं। प्रतिबंधित इस्लामी आतंकवादी समूहों से जुड़े छोटे दलों की अभूतपूर्व भागीदारी से भी उग्रवादियों को बढ़ावा मिलता है।" 

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00