POJK Protests: PAK फिर बेनकाब, मुजफ्फराबाद में प्रदर्शनकारियों का दमन; 50 ब्रिटिश सांसदों ने भी जताई चिंता
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (POJK) में प्रदर्शनकारियों के दमन की खबरें सामने आई हैं। मुजफ्फराबाद में आंसू गैस के गोले दागे गए हैं। ब्रिटेन में 50 से अधिक सांसदों ने पीओजेके की स्थिति पर चिंता जताई है। इन सांसदों ने ब्लैकआउट, गिरफ्तारियों और बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री यवेट कूपर को पत्र लिखा है। जानिए क्या है पूरा मामला
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सांसद ने पीओजेके के हालात और ब्रिटिश कश्मीरी जनता को लेकर क्या कहा?
सांसद इमरान हुसैन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हम लगातार लॉकडाउन, संचार ब्लैकआउट, गिरफ्तारियों और बढ़ते तनाव की खबरों को लेकर चिंतित हैं।' हुसैन ने कहा कि सरकार को सभी राजनयिक चैनलों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कश्मीरियों के मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की। सांसदों ने कहा कि कई ब्रिटिश कश्मीरी पीओजेके में अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
As Chair of the APPG on Kashmir, our letter to the Foreign Secretary now has the support of over 50 Parliamentarians.
— Imran Hussain MP (@Imran_HussainMP) June 8, 2026
We remain deeply concerned by reports of a continued lockdown, a communications blackout, arrests and escalating tensions.
The UK Government must use all… pic.twitter.com/djhXkBPuoS
इस बीच, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की खबर सामने आई है। इस घटना में करीब 11 लोगों की जान चली गई और 70 से अधिक लोग घायल हो गए। जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पुलिस के अनुसार, जेएएसी के प्रदर्शनकारी एक अस्पताल के शवगृह के बाहर जमा हुए थे। वे पुलिस फायरिंग में मारे गए एक सदस्य के शव के लिए शोक सभा कर रहे थे। पुछ सेक्टर के आयुक्त सरदार वहीद खान ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिस अधिकारी और एक राहगीर की मौत हुई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक ने बताया कि रविवार की घटना में 23 सुरक्षाकर्मी और 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। 30 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। जेएएसी आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए काम करती है, जिस पर पाकिस्तान सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। क्षेत्रीय सरकार ने शुक्रवार को जेएएसी को आतंक रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित समूह घोषित किया था।
विरोध और दमन
जेएएसी ने क्षेत्रीय विधानसभा के लिए 27 जुलाई को होने वाले चुनावों के विरोध में मंगलवार को बंद का आह्वान किया है। विधानसभा की 45 में से 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जिनका दुरुपयोग होता है। इन सीटों पर स्थानीय लोगों के बजाय पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों के लोगों को नामित किया जाता है। जेएएसी नेता शौकत मीर ने कहा कि सरकार ने रावलकोट में लोगों का कत्लेआम शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने कब्जे वाले कश्मीर में टेलीफोन व इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।
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भारत का रुख और स्थानीय आक्रोश
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में किसी भी चुनाव का पुरजोर विरोध किया है। नई दिल्ली ने कहा कि पूरा जम्मू कश्मीर व लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान को अवैध कब्जा जल्द खाली करना चाहिए। स्थानीय लोग सरकारी दमन, बिजली की भारी कमी, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से लंबे समय से क्रोधित हैं। मानवाधिकार संगठनों ने पीओके में हिंसा और जेएएसी पर प्रतिबंध को लेकर चिंता जताई है। सरकार ने घरेलू व विदेशी पर्यटकों को नौ जून से पहले इलाका छोड़ने की सलाह दी है।