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प्रोग्रेसिव धड़े के आक्रामक रुख से बाइडन के सामने पेश हुईं नई चुनौतियां, बढ़ सकता है टकराव

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 18 Mar 2021 05:19 PM IST

सार

अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के ऊपरी सदन सीनेट में बुधवार को सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स ने उन बड़ी कंपनियों पर टैक्स बढ़ाने का बिल पेश किया, जो अपने सीईओ को अपने बाकी कर्मचारियों के औसत वेतन से 50 गुना ज्यादा तनख्वाह देती हैं...
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार

अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील धड़े ने आक्रामक अंदाज में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि इससे आगे चल कर राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इससे पार्टी के भीतर टकराव भी बढ़ सकता है।

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अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के ऊपरी सदन सीनेट में बुधवार को सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स ने उन बड़ी कंपनियों पर टैक्स बढ़ाने का बिल पेश किया, जो अपने सीईओ को अपने बाकी कर्मचारियों के औसत वेतन से 50 गुना ज्यादा तनख्वाह देती हैं। सैंडर्स सीनेट की बजट समिति के अध्यक्ष भी हैं। उनकी पहल पर बुधवार को देश में बढ़ी आर्थिक गैर-बराबरी के मुद्दे पर सुनवाई भी शुरू हुई।


दूसरी तरफ कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में प्रगतिशील धड़े से जुड़ीं डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता प्रमिला जयपाल ने मेडिकेयर फॉर ऑल योजना लागू करने का बिल पेश किया। राष्ट्रपति बाइडन मेडिकेयर फॉर ऑल के खिलाफ रहे हैं। जबकि पिछले साल जब डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने की होड़ चल रही थी, तब बर्नी सैंडर्स ने इसे अपना प्रमुख मुद्दा बनाया था। अब प्रमिला जयपाल और इस बिल के समर्थक डेमोक्रेटिक पार्टी के 109 सांसदों का कहना है कि कोरोना महामारी के अनुभव ने मेडिकेयर फॉर ऑल को अनिवार्य बना दिया है। उन्होंने जोर दिया कि देश में इस समय मौजूद स्वास्थ्य बीमा योजना को खत्म कर सबके लिए स्वास्थ्य की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

विश्लेषकों के मुताबिक इन दोनों में से किसी बिल के पारित होने की संभावना नहीं है। रिपब्लिकन पार्टी इन दोनों प्रस्तावित कानूनों की विरोधी है। साथ ही डेमोक्रेटिक पार्टी का भी एक बहुत बड़ा खेमा इन्हें लागू करने के लिए तैयार नहीं है। इसके बावजूद प्रोग्रेसिव धड़े ने बिल पेश किया, तो माना जा रहा है कि इसके पीछे उनकी दीर्घकालिक रणनीति है। जानकारों के मुताबिक वे बहस को अपने मुद्दों और एजेंडे पर टिकाए रखना चाहते हैं। हाल के तमाम जनमत सर्वेक्षणों में इन मुद्दों के लिए भारी समर्थन देखा गया है। इससे प्रोग्रेसिव्स का उत्साह बढ़ा है।

सीनेट में बर्नी सैंडर्स ने चेतावनी दी कि अमेरिका एक कुलीनतंत्र बनने की तरफ बढ़ रहा है, जहां धनी लोगों का धन तेजी से बढ़ता जा रहा है। जबकि श्रमिक वर्ग के परिवार वैसी मुसीबत झेल रहे हैं, जैसा 1930 के दशक की महामंदी के बाद कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि आमदनी और धन की विशाल गैर-बराबरी के बीच अमेरिकी जनता यह मांग कर रही है कि मुनाफा कमा रही कंपनियां अपने हिस्से का उचित टैक्स दें और अपने कर्मचारियों को वह गरिमा और सम्मान प्रदान करें, जिसके वे हकदार हैं। सैंडर्स के बिल का समर्थन करने वालों में डेमोक्रेटिक पार्टी की एलिजाबेथ वॉरेन, एड मार्के, क्रिस वान हॉलेन आदि जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक अगर सैंडर्स का बिल पिछले साल कानून के रूप में मौजूद होता तो वॉलमार्ट कंपनी को 84 करोड़ 49 लाख, होम डिपो को 55 करोड़, जेपी मॉर्गन चेज को सवा 17 करोड़, नाइकी को लगभग 15 करोड़, मैकडॉनल्ड को सात करोड़ और अमेरिकन एयरलाइंस को सवा दो करोड़ डॉलर अधिक टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता।

मेडिकयर फॉर ऑल योजना में प्रावधान है कि सभी अमेरिकियों को मुफ्त इलाज सरकारी सिस्टम के तहत उपलब्ध कराया जाएगा। बिल पेश करने वाले सांसदों ने दावा किया कि पिछले साल अमेरिकी वोटरों ने मेडिकेयर फॉर ऑल योजना के वादे के कारण पार्टी को वोट दिया, जिस वजह से जो बाइडन राष्ट्रपति बने। हालांकि बिल पेश होने के बाद व्हाइट हाउस के सूत्रों ने मीडिया को अनौपचारिक ब्रीफिंग में ध्यान दिलाया कि पूरे चुनाव अभियान के दौरान बाइडन ने निजी तौर पर कभी मेडिकेयर फॉर ऑल का समर्थन नहीं किया था।

विश्लेषकों का कहना है कि प्रोग्रेसिव धड़े के नए आक्रामक रुख के कारण जो बाइडन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बाइडन के सामने चुनौती उन तमाम तबकों को साथ लेकर चलने की है, जिन्होंने उन्हें वोट दिया। उनमें बहुत से ऐसे तबके हैं, जो निजी हेल्थ बीमा योजना को बनाए रखना चाहते हैँ। इसलिए बाइडन के लिए सबसे बेहतर रास्ता यह है कि वे ओबामा केयर कही जाने वाली बीमा योजना को आगे बढ़ाएं और धीरे-धीरे दूसरी स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूत करें। लेकिन प्रोग्रेसिव धड़े की आक्रामकता देश के बहुत बड़े तबके की नजर में उनकी साख खत्म कर सकती है, जिनमें पहले से ये धारणा है कि बाइडन असल में कॉरपोरेट सेक्टर के काबू में हैं।

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