भारत सरकार द्वारा साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार वर्ष 2025 के लिए घोषित कर दिया गया है। इस वर्ष संस्कृत भाषा के लिए यह सम्मान गुजरात के विद्वान महामहोपाध्याय स्वामी भद्रेशदासजी को उनकी कृति वर्ष 2018 में प्रकाशित “प्रस्थानचतुष्टये ब्रह्मघोषः” के लिए प्रदान किया गया है।
सूत्रात्मक शैली में पद्य रूप में रचित इस ग्रंथ को विद्वान एक दार्शनिक काव्य के रूप में देखते हैं। इसकी साहित्यिक विशेषताओं और दार्शनिक गहराई को ध्यान में रखते हुए विद्वानों की चयन समिति ने इसे वर्ष 2025 की श्रेष्ठ संस्कृत कृति के रूप में चयनित किया है। बीएपीएस (BAPS) शोध संस्थान, अक्षरधाम, नई दिल्ली के सह निदेशक ज्ञानानंद स्वामी ने मीडिया को बताया कि “भारत की श्रेष्ठ संस्कृत कृति के रूप में चयनित इस ग्रंथ “प्रस्थानचतुष्टये ब्रह्मघोषः” में हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथों — उपनिषद, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र — के साथ-साथ भगवान स्वामिनारायण द्वारा प्रदत्त वचनामृत के आधार पर ब्रह्म तत्त्व का विशद विवेचन किया गया है।” उन्होंने विशेष कहा कि इस ग्रंथ में भगवान स्वामिनारायण द्वारा प्रतिपादित तत्त्वज्ञान को साहित्यिक शैली में प्रस्तुत किया गया है। इस ग्रन्थ-रचना के प्रेरक अबूधाबी (UAE) और रोबिन्स्विल(अमेरिका) में भव्य हिन्दू मंदिरों के निर्माता विश्व वन्दनीय महंत स्वामी महाराज हैं। इस पुरस्कार की घोषणा के बाद विद्वानों और साहित्य प्रेमियों में हर्ष और गौरव की अनुभूति हुई है।
एक दिन पहले
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