तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा
- बशीर बद्र 


सुर्ख़ मौसम की कहानी तो पुरानी हो गई
खुल गया मौसम तो सारे शहर में चर्चा हुआ
- पी पी श्रीवास्तव रिंद ...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           मिरे सारे बदन पर दूरियों की ख़ाक बिखरी है 
तुम्हारे साथ मिल कर ख़ुद को धोना चाहता हूँ मैं 
- फ़रहत एहसास

दिल ने तमन्ना की थी जिस की बरसों तक 
ऐसे ज़ख़्म को अच्छा कर के बैठ गए 
- ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
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2 days ago
                                                                           तुम हमारे किसी तरह न हुए
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता 


कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो ...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           रोज़ अच्छे नहीं लगते आँसू
ख़ास मौक़ों पे मज़ा देते हैं 


मैं ही था मंज़िलों पे पड़ा हाँफता
रास्तों में ठहरता हुआ मैं ही था ...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना 
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना 
- अकबर इलाहाबादी

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह 
ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ 
- आरज़ू लखनवी
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1 week ago
                                                                           मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता 


ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुम ने
क्यूँ पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में
तिरी याद आँखें दुखाने लगी
- आदिल मंसूरी 


बे-मक़्सद महफ़िल से बेहतर तन्हाई
बे-मतलब बातों से अच्छी ख़ामोशी
- ऐन इरफ़ान...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           हमें दुनिया फ़क़त काग़ज़ का इक टुकड़ा समझती है
पतंगों में अगर ढल जाएँ हम तो आसमाँ छू लें
- नफ़स अम्बालवी

पतंग कट गई तो इस का इतना ग़म क्यूँ है
पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था
- शहराम सर्मदी

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1 week ago
                                                                           हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है 


मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           आँखों को भी ले डूबा ये दिल का पागल-पन
आते जाते जो मिलता है तुम सा लगता है 


मुझ को मालूम है सच ज़हर लगे है सब को
बोल सकता हूँ मगर होंट सिए बैठा हूँ ...और पढ़ें
2 weeks ago
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