तुम अपने सामने की भीड़ से हो कर गुज़र जाओ
कि आगे वाले तो हरगिज़ न तुम को रास्ता देंगे 


कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िंदगी क्या है
ज़मीं से एक मुट्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे ...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           सिराज की शायरी और ग़ज़लों में विषय चाहे जो हों लेकिन ताजापन बना रहता है, इससे उनके रचनात्मक अनुभव और दूरदर्शिता का पता चलता है। सिराज जीवन को अलग नजरिए से देखते हैं। आज हम पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं सिराज लखनवी के 20 चुनिंदा शेर-

मैं...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           वाणी प्रकाशन से प्रकाशित किताब 'दाग़ देहलवी: ग़ज़ल का एक स्कूल' में निदा फाज़ली लिखते हैं-  "दाग़ का बुढ़ापा, आर्थिक संपन्नता होते हुए भी बेसुकून गुज़रा, बीवी के देहांत ने उनके अकेलेपन को ज़्यादा गहरा कर दिया था, जिसे बहलाने के लिए वह एक साथ क...और पढ़ें
                                                
1 day ago
                                                                           सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें
आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत
- बशीर बद्र ...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           उसकी आँखों में भी काजल फैल रहा है
मैं भी मुड़के जाते-जाते देख रहा हूँ


ये सच है बेकार हमें ग़म होता है
जो चाहा था दुनिया में कम होता है...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           मुँह फेर लिया सब ने बीमार को जब देखा
देखा नहीं जाता वो तुम जिस की तरफ़ देखो


तुम थे और हम थे चाँद निकला था
हाए वो रात याद आती है ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           दो घड़ी दर्द ने आँखों में भी रहने न दिया 
हम तो समझे थे बनेंगे ये सहारे आँसू 
 ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ
जाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं


अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को
मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ को ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           
रुहानियत ने चुना ग़ालिब को, दर्द मीर का हो गया
और शोख शरारतें  बोलीं, हम दाग़ पर फिदां हैं


नवाब मिर्जा खां दाग़ के बारे में ये कच्चा और अनगढ़ शेर मेरा है और इसे मैंने पूरे हक से लिखा है। हक इस तरह कि दाग़, मीर और ग़ालिब की तरह मेरा बचपन भी चा...और पढ़ें
                                                
2 weeks ago
                                                                           मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है
वो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता है


वो मिरे दिल की परेशानी से अफ़्सुर्दा हो क्यूँ
दिल का क्या है कल को फिर अच्छा भला हो जाएगा ...और पढ़ें
2 weeks ago
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