दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग़
तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो 


वही होगा जो हुआ है जो हुआ करता है
मैं ने इस प्यार का अंजाम तो सोचा भी नहीं ...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के / फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास हैं
तुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के

इक फ़...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           फ़ासला रख के भी क्या हासिल हुआ
आज भी उस का ही कहलाता हूं मैं
- शारिक़ कैफ़ी 


बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहां दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता
- बशीर बद्र ...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           तरक्की पसंद शायरी के दौर में जिस एक शायर ने मूल लहजे को बजिद नहीं छोड़ा और तमाम उम्र ग़ज़ल की नाज़ुक मिज़ाजी से मुतासिर रहा, अहमद फ़राज़ शायरी में उसी शख़्सियत का नाम है। फ़ैज़ के गम-ए- दौरां अपने गम-ए-जानां की एक अलहद और पुरकशिश दुनिया बनाकर फ़राज़...और पढ़ें
                                                
4 days ago
                                                                           निदा फ़ाज़ली तरक़्क़ी पसंद रिवायत का हिस्सा थे। उन्होंने अपनी शायरी में रूढ़िवादी परंपराओं से इंहराफ़ कर एहसासों को इस सलीक़े से अपने अशआर में पिरोया है कि उनकी शायरी जीवंत हो उठती है और भेदभाव ख़त्म हो जाते हैं। नज़रों के सामने एक समान आकृतियां उभरने...और पढ़ें
                                                
5 days ago
                                                                           बंद कमरे में ज़ेहन क्या बदले
घर से निकलो तो कुछ फ़ज़ा बदले
- महताब आलम 


अक़्ल से सिर्फ़ ज़ेहन रौशन था
इश्क़ ने दिल में रौशनी की है
- नरेश कुमार शाद ...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख़्सत हुआ तब याद आया


भरी दुनिया में जी नहीं लगता
जाने किस चीज़ की कमी है अभी ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           कुछ ख़बर होती तो मैं अपनी ख़बर क्यूं रखता
ये भी इक बे-ख़बरी थी कि ख़बर-दार रहा
- अनवर देहलवी


जो दिल को है ख़बर कहीं मिलती नहीं ख़बर
हर सुब्ह इक अज़ाब है अख़बार देखना
- उबैदुल्लाह अलीम...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           अभी से क्यूं छलक आए तुम्हारी आंख में आंसू
अभी छेड़ी कहां हैं दास्ताने-ज़िंदगी मैंने 
- अमीर मीनाई 

ज़ख़्मी न हुआ था दिल ऐसा, सीने में खटक दिन-रात थी
पहले भी हुए थे सदमें बहुत, रोये थे, मगर यह बात न थी
- सौदा...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर 
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है 

बस जान गया मैं तिरी पहचान यही है 
तू दिल में तो आता है समझ में नहीं आता 

पैदा हुआ वकील तो शैतान ने कहा 
लो आज हम भी...और पढ़ें
2 weeks ago
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