अब तक जो सराब आए थे अनजाने में आए
पहचाने हुए रस्तों का धोका भी तो देखूँ 


कभी कभी वो हमें बे-सबब भी मिलता है
असर हुआ नहीं उस पर अभी ज़माने का ...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           
गली के मोड़ से घर तक अँधेरा क्यूँ है 'निज़ाम'
चराग़ याद का उस ने बुझा दिया होगा

मंज़िलें भर दे आँख में उस की
उस के पैरों में फिर सफ़र रख दे ...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           कौन कहे मा'सूम हमारा बचपन था 
खेल में भी तो आधा आधा आँगन था 
~शारिक़ कैफ़ी
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3 days ago
                                                                           
ज़िंदगी मौत तेरी मंज़िल है
दूसरा कोई रस्ता ही नहीं 


अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझ में
मुझ को मुझ से जो जुदा कर के छुपा है मुझ में ...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           मिलने से निगाहों के क्या फ़ाएदा होता है
ये बात मैं समझा दूँ तुम मेरी तरफ़ देखो


तुम ने छेड़ा तो कुछ खुले हम भी
बात पर बात याद आती है ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           तेरे पहलू से जो उठ्ठूँगा तो मुश्किल ये है
सिर्फ़ इक शख़्स को पाऊँगा जिधर जाऊँगा 


तुझ से किस तरह मैं इज़्हार-ए-तमन्ना करता
लफ़्ज़ सूझा तो मुआ'नी ने बग़ावत कर दी ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           
मरूं तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊं
'नदीम' काश यही एक काम कर जाऊं
- अहमद नदीम क़ासमी 


मिलते हुए दिलों के बीच और था फ़ैसला कोई
उस ने मगर बिछड़ते वक़्त और सवाल कर दिया 
- परवीन शाकिर ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           
मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा
कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए 


अब वहम है ये दुनिया इस में
कुछ खोओ तो क्या और पाओ तो क्या ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           उस मय से नहीं मतलब दिल जिस से है बेगाना
मक़्सूद है उस मय से दिल ही में जो खिंचती है


वो गुल हूँ ख़िज़ाँ ने जिसे बर्बाद किया है
उलझूँ किसी दामन से मैं वो ख़ार नहीं हूँ ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था
वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था 


मुहब्बतों का सलीका सिखा दिया मैंने 
तेरे बग़ैर भी जीकर दिखा दिया मैंने...और पढ़ें
2 weeks ago
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