अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली...और पढ़ें
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मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है
उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते
मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का
मैं चुप रहूँ...और पढ़ें
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