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दिल का हर दर्द खो गया जैसे
मैं तो पत्थर का हो गया जैसे

दाग़ बाक़ी नहीं कि नक़्श कहूँ
कोई दीवार धो गया जैसे

जागता ज़ेहन ग़म की धूप में था
छाँव पाते ही सो गया जैसे

देखने वाला था...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- रेणु, जिसका अर्थ है- धूल, बालू,कण। प्रस्तुत है शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कविता- व्याकुल वसुंधरा की काया

लौह-पदाघातों से मर्दित
हय-गज-तोप-टैंक से खौंदी
रक्तधार से...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           लिखना जो चाहा तुझे अल्फाजों में
मेरी जिंदगी की ये सारी किताब भर गई
किस्से लिखता गया तेरी वफ़ा के
न जाने कब ये कायनात बीत गई
गांव से शहर शहर से न जाने
कब ये देश की बात बदल गई
मैं तो था अभी नींद में गहरी
...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           भारत यह देश अपना
जिसका टूट गया है सपना
सीख लिया है हमने पैसों की माला जपना
रिश्ते खत्म हुए
सब रिश्तों में लगी है आग
नफरत भरी है इतनी दिलों में लगी है आग
बोलचाल सब बंद है कमरों में सब बंद है
भाई से भाई...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           हर नागरिक का सौंपा हुआ अहसान हूं मैं ।
बच्चों बुजुर्गों और महिलाओं का मान हूं मैं ।।

शोषित गरीबों और किसानों का आत्मसम्मान हूं मैं ।
मैं ही हिन्दू ,सिख और मुसलमान हूं मैं ।।

मैं गुरु गोविंद हु ,जीसस हूं और...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           धुआँ धुआँ है फ़ज़ा रौशनी बहुत कम है
सभी से प्यार करो ज़िंदगी बहुत कम है

मक़ाम जिस का फ़रिश्तों से भी ज़ियादा था
हमारी ज़ात में वो आदमी बहुत कम है

हमारे गाँव में पत्थर भी रोया करते थे
यहाँ तो फूल में...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           ख़ुशी तब होती है जब आपके विचार, आपके शब्द और आपके कर्म आपस में सामंजस्य में हों।
- महात्मा गांधी  
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15 hours ago
                                                                           बीते हुए लम्हों को सोचा तो बहुत रोया
जब मैं तिरी बस्ती से गुज़रा तो बहुत रोया

पत्थर जिसे कहते थे सब लोग ज़माने में
कल रात न जाने क्यूँ रोया तो बहुत रोया

बचपन का ज़माना भी क्या ख़ूब ज़माना था
मिट्टी क...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           दुख से दूर पहुँचकर गाँधी।
सुख से मौन खड़े हो
मरते-खपते इंसानों के
इस भारत में तुम्हीं बड़े हो

जीकर जीवन को अब जीना
नहीं सुलभ है हमको
मरकर जीवन को फिर जीना
सहज सुलभ है तुमको

हमारे...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           ऋतुराज के स्वागत में, प्रकृति श्रृंगारित आज,
पीत वसन पीतांबरी, बसंत का शुभ आगाज़।
मलयानिल के मृदु स्पर्श से, पुलकित वन-उपवन,
नव रागों में ढल उठी, धरा-गगन की चेतन।

आम्र-मंजरी हँसती बोले, कोयल छेड़े तान,
भृंग...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           गंगा की गोद में जन्मी वह पावन धरती,
जहाँ ऋषियों की तपस्या ने पाई अमर कीर्ति।
कदम-कदम पर इतिहास साँसें भरता है,
वह पुण्यभूमि—बक्सर कहलाता है।
यहीं महर्षि विश्वामित्र ने तप का दीप जलाया,
यहीं राम-लक्ष्मण ने शस्त्र विद...और पढ़ें
15 hours ago
कविता
                                                                           मैं फिर जनम लूँगा 
फिर मैं 
इसी जगह आऊँगा 
उचटती निगाहों की भीड़ में 
अभावों के बीच 
लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा 

लँगड़ाकर चलते हुए पावों को 
कंधा दूँगा 
गिरी हुई पद-मर्दित पराजित...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           सूखे हुए शज़र पे
बहारें नहीं आती,
दिल हो टूटा हुआ गर, तो
उसमें फिर उल्फ़त नहीं
आती...,

तन्हाई में भी उठता है
भीतर में कोई शोर..
जब रूह ही हो खाली, तो
फ़िर
जिंदगानी नहीं आती..।।।और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           हे ज्ञानदायनी मां सरस्वती मां
मेरे मन के अज्ञानता को ज्ञान से
प्रकाशित कर दो मां
हे हंसवाहिनी मां सरस्वती मां
मेरे मन के क्लेशों को
हंसो की तरह श्वेत कर दो मां
हे वीणा वादनी मां सरस्वती मां
मेरे मन के...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           तुम पूछती हो मेरे दिल की ऐसी हालत क्यूॅं है!
मैं ख़ुद से पूछता हूॅं मुझे तुम से मोहब्बत क्यूॅं है!!

- आलम-ए-ग़ज़ल परवेज़ अहमद...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           आरा केवल एक नगर नहीं,
यह इतिहास की जीवित गाथा है,
जहाँ हर कण में स्वाभिमान बसा,
हर सांस में आज़ादी की भाषा है।
भोजपुर की इस पावन धरती ने
वीरों को जन्म दिया है,
कुँवर सिंह की तलवार ने
अंग्रेज़ी हुकूमत क...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           मुझसे कई बार मैं होकर गुजरी
मैंने कहा कौन हो तुम
उसने जबाव दिया तुम कौन हो

मैंने कहा फलां है मेरा नाम
उसने कहा झूठ बोल रही हो

कुछ रस्ते थे टेढ़े मेढ़े
मैं उन रस्तों होकर गुजरी
मुझसे कई...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           जब इन्सान ने परछाईं से कहा,
मै अकेला हूँ क्या तू है मेरे साथ।
तब परछाई ने इन्सान से कहा,
मैं नहीं तो और कौन है तेरे साथ।
हाँ, वैसे
तो मैं ही रहती हर दम तेरे साथ।
चाहे दिन हो और चाहे हो रात।
पर,
...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           मैंने उनको देखा
अपने घर के आँगन में।
वो जीवित है,
पर जीवंत नहीं।
ना खुलकर कभी वो हँसती है,
ना ही मैंने रोते देखा।
हर क्षण उनको
बस मैंने
औरों की फ़िक्र में
तपते देखा।
वो टूट चुकी है...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           गर तुम छोड़ना भी चाहो तो भी तुम्हें ना छोड़ूंगा,
तुम मुझे से प्यार करो या ना करो,
मैं तुम से प्यार करता हूं, और करता रहूंगा,
तुम मेरी तरफ देखो या ना देखो,
मैं तुम्हें ही देखता हूं, तुम्हें देखता रहूंगा,
अगर तुम छोड़...और पढ़ें
16 hours ago
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