किसी की आँखों से अपना चेहरा निकालना है
नदी के पानी से ख़ुद को प्यासा निकालना है
उसे कहो तुम कि डोर रिश्तों की सीधी रक्खे
मोहब्बतों की ज़मीं का रक़्बा निकालना है
जो मुस्तहिक़ हो हमारे दिल का क़रीब आए
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दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे
जल्द या देर से मारे तो सभी जाएँगे
सिर्फ़ मैं ही नहीं बाज़ार की मंदी का शिकार
जेब में ले के ख़सारे तो सभी जाएँगे
नद्दियाँ लाशों को पानी में नहीं रखती हैं
तैरें या ड...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अवदात, जिसका अर्थ है-उज्जवल, सफेद, स्वच्छ, निर्मल। प्रस्तुत है महेन्द्र भटनागर की कविता- कौन तुम अरुणिम उषा-सी
कौन तुम अरुणिम उषा-सी मन-गगन पर छा गयी हो ?
लोक-धूमिल र...और पढ़ें
ख्याति न मिलने की कुंठा भीतर-भीतर विरोधी बना देती है।
~देवीशंकर अवस्थी
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आज जब हमारी उंगलियां दिन भर स्मार्टफोन की स्क्रीन पर बस 'रील्स' और 'शॉर्ट्स' खिसकाने में लगी रहती हैं, तब साहित्य की दुनिया से एक ऐसी खबर आई है जो हमें पल भर रुककर अपने अतीत, अपनी यादों और अपनी जड़ों की ओर देखने पर मजबूर कर देती है। ह...और पढ़ें
क्षमा, क्षमा और क्षमा,क्यों कौंधता है मुझमें ?
कितनी बार क्षमा कर दूंँ, नहीं निर्बल मुझे समझे।।
यदि क्षमा कर भी दूँ मैं, होगा यह भीषण अपराध ।
रोती सिसकती घुटती आहें, रहने देंगी निरपराध ?
पापियों का मनोबल तो...और पढ़ें
अकेलापन एक ऐसी स्थिति है,
जहां है ख़ालीपन,अनिश्चितता,अलगाव,
यह मन की एक भावनात्मक स्थिति होती है,
इंसान को लगता है,
कि उसे अनदेखा किया जा रहा है.
अकेलेपन को स्वीकार करना ही होगा एक दिन,
यह आदत सभी के...और पढ़ें
हम जख्मों के समंदर से खुशी के मोती चुरा लेते हैं।
दुनिया क्या हमें समझाएगी,कि खुश कैसे होते हैं।।
हमें बने बनाए आसान राह नहीं फबते है।
हम खुद के बनाएं नियम,वसूलों पे चलते है।।
हमें नहीं पता किस्मत के भरोसे...और पढ़ें
व्यर्थता में मनगढ़ंत कहानियां रचता हूं।
काल्पनिक संसार गढ़ता हूं
सुख-दुःख का भान करता हूं
प्रफुल्लित व द्रवित होता हूं।
अंत में परिणामतः
सुन्दर वर्तमान खोता हूं।
सपने संजोना
मधुकर है काल्पनिकता...और पढ़ें
इश्क़ के दीवानों ने जबभी किया है इश्क़ पुर जुनून किया है,
इश्क़ ने मग़र न कल सुकून दिया है ना आज सुकून दिया है!
येह कमबख़्त आशिकी न कभी रास आई उस को जमाने में,
आशिक बेचारा मुहब्बत का मारा सदा ही बे-सुकून जिया है!
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मैं अकेला ही काफ़ी हूं
लोग कहते है कभी - कभी
इक बात बताए वे लोग मुझे
किस अकेलेपन की बात तुम करते हो
गहरी निशा की तन्हाई का
अकेलापन सहा कभी ,
महफ़िल की भीड़ में तुम तन्हा हुए कभी
देखा मैंने अकेले में री...और पढ़ें
खामोश लब्जे भी कुछ कहती है।
बस,महसूस करने की शक्ति सब में नहीं होती है।।
खामोशी की आवाज दुनिया नहीं सुनती है।
सब आज कल खुद में ही सिमटे रहते है।।
दूर दूर तक अपना कोई नजर नहीं आता।
यूं तो दुनिया में ल...और पढ़ें
मेरे दो अनमोल रतन।
एक कागज एक कलम।।
तीसरा है मीठा वचन।
चौथा मन में ना जलन।।
पांचवा शुद्ध आचरण।
छठा सिम्पल जीवन।।
आठवां मन में लगन।
नौवा मुहब्बत ही धन।।
दसवां चैन शांति अमन।
ग्यारहवां मां...और पढ़ें
प्यार अगर थामता न पथ में उँगली इस बीमार उमर की
हर पीड़ा वेश्या बन जाती, हर आँसू आवारा होता।
निरवंशी रहता उजियाला
गोद न भरती किसी किरन की,
और ज़िंदगी लगती जैसे—
डोली कोई बिना दुल्हन की
दुख से स...और पढ़ें
दो दोस्त मिलकर जीवन को खूबसूरत बना देते हैं।
दो एक मां एक पिता जी मिलकर खुशियों से भर देते हैं।
दो पांव जिंदगी के खूबसूरत सफर पूरे कर देते हैं।
दो आंखें अप्रतिम जीवन के दृश्य बन जाते हैं।
दो हाथ लेकर हम कर्म भूमि में उतर ज...और पढ़ें
प्यार से ही दुनिया जीती जा सकती है।
नफरत से तो नाश अवश्य हो जाते हैं।।
-ममता तिवारी...और पढ़ें
हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है
वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है
प्यार की ख़ातिर कुछ भी हम कर सकते हैं
वो तेरी मज़दूरी भी हो सकती है
सुख का दिन कुछ पहले भी चढ़ सकता है
दुख की रात उबूरी भी हो सकती है...और पढ़ें
Shabd Samman 2025: आकाशदीप से सम्मानित लेखिका ममता कालिया से ख़ास बातचीत...और पढ़ें
मैं तल्ख़ी-ए-हयात से घबरा के पी गया
ग़म की सियाह रात से घबरा के पी गया
इतनी दक़ीक़ शय कोई कैसे समझ सके
यज़्दाँ के वाक़िआ'त से घबरा के पी गया
छलके हुए थे जाम परेशाँ थी ज़ुल्फ़-ए-यार
कुछ ऐस...और पढ़ें