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                                                                           किसी की आँखों से अपना चेहरा निकालना है
नदी के पानी से ख़ुद को प्यासा निकालना है

उसे कहो तुम कि डोर रिश्तों की सीधी रक्खे
मोहब्बतों की ज़मीं का रक़्बा निकालना है

जो मुस्तहिक़ हो हमारे दिल का क़रीब आए
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22 hours ago
                                                                           दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे
जल्द या देर से मारे तो सभी जाएँगे

सिर्फ़ मैं ही नहीं बाज़ार की मंदी का शिकार
जेब में ले के ख़सारे तो सभी जाएँगे

नद्दियाँ लाशों को पानी में नहीं रखती हैं
तैरें या ड...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अवदात, जिसका अर्थ है-उज्जवल, सफेद, स्वच्छ, निर्मल। प्रस्तुत है महेन्द्र भटनागर की कविता- कौन तुम अरुणिम उषा-सी

कौन तुम अरुणिम उषा-सी मन-गगन पर छा गयी हो ?

लोक-धूमिल र...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           ख्याति न मिलने की कुंठा भीतर-भीतर विरोधी बना देती है।

~देवीशंकर अवस्थी

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22 hours ago
                                                                           
प्यार अगर थामता न पथ में उँगली इस बीमार उमर की
हर पीड़ा वेश्या बन जाती, हर आँसू आवारा होता।

निरवंशी रहता उजियाला
गोद न भरती किसी किरन की,
और ज़िंदगी लगती जैसे—
डोली कोई बिना दुल्हन की
दुख से स...और पढ़ें
6 hours ago
                                                                           सचमुच ,
पुल या दीवार का - -
निर्माण ,
एक ही प्रकार से - -
होता है ,
या यों कहे तो - -
एक ही प्रकार के ,
सामग्री से - -
या एक ही प्रकार के,
कच्चे माल से - -
होता है ,
लेकिन...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           दिलासे दिलाए कभी जिंदगी ने
बहाने बनाए कभी जिंदगी ने
कभी फांकों पर ही हमे रखा जिंदा
खजाने लुटाए कभी जिंदगी ने
ये बात और है बेरंग हो गई है
सभी रंग दिखाए हमें जिंदगी ने
हमारी ही होकर,कई पहलू अपने
छिपाए, द...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           
मैं तल्ख़ी-ए-हयात से घबरा के पी गया
ग़म की सियाह रात से घबरा के पी गया

इतनी दक़ीक़ शय कोई कैसे समझ सके
यज़्दाँ के वाक़िआ'त से घबरा के पी गया

छलके हुए थे जाम परेशाँ थी ज़ुल्फ़-ए-यार
कुछ ऐस...और पढ़ें
6 hours ago
                                                                           
मुक्ति का जब कोई रास्ता नहीं मिला
मैं लिखने बैठ गया हूँ

मैं लिखना चाहता हूँ 'पेड़'
यह जानते हुए कि लिखना पेड़ हो जाना है
मैं लिखना चाहता हूँ 'पानी'
'आदमी' 'आदमी' –...और पढ़ें
6 hours ago
                                                                           सचमुच ,
ईश्वर ने - -
सृष्टि की ,
रचना करते समय - -
तीन चीजें का,
विशेष रुप से - -
रचना या संरचना की ,
अनाज तो पैदा किए - -
लकिन ,
उनके साथ - -
कीड़े भी पैदा किए,
यदि ऐसा...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है
वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है

प्यार की ख़ातिर कुछ भी हम कर सकते हैं
वो तेरी मज़दूरी भी हो सकती है

सुख का दिन कुछ पहले भी चढ़ सकता है
दुख की रात उबूरी भी हो सकती है...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट,
किस्मत का हूँ मारा,
हर जगह दुतकरा जाता,
हर कोई बाय-पास करने की करता कोशिश,
हर कोई नई तरकीब लगाता,
छुटकारा पाने की कोशिश है करता,
मैं हूं फटा हुआ नोट,मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           एक रात उस अजनबी के साथ
मैंने बिताए जो पल,वो रहेगा जिंदगी भर याद।
वो मेरे जुल्फों के पनाहों में था,
मैं उसके बाहों में थी।
आंखों से कुछ कह गया,
वो मुझमें बह गया।
लगा पुरानी जान पहचान,
वो ऐसे मिला
...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           दिल की हर बात बताऊँ मैं,
क्या दर्द तुम्हें सुनाऊँ मैं।

तुम आँखों से ही समझ लो ना,
जो लफ़्ज़ों से कह न पाऊँ मैं।

ये इश्क़, मोहब्बत, चाहत सब,
कहो तो फिर दोहराऊँ मैं।

रात अभी थोड़ी बाक़ी...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           
पड़ी रहेगी अगर ग़म की धूल शाख़ों पर
उदास फूल खिलेंगे मलूल शाख़ों पर

अभी न गुलशन-ए-उर्दू को बे-चराग़ कहो
खिले हुए हैं अभी चंद फूल शाख़ों पर

निकल पड़े हैं हिफ़ाज़त को चंद काँटे भी
हुआ है जब भी...और पढ़ें
6 hours ago
                                                                           रिश्ते शब्दों से नहीं,
एहसासों से ज़िंदा रहते हैं,
जहाँ सच्चा अपनापन हो
वहीं रिश्ते मुकम्मल होते हैं।
-संजय श्रीवास्तव...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           मेरा दिल बार-बार मुझसे,
एक ही सवाल करता है।
हमारे देश के गरीब
सच में, गरीब है?
या अमीरों के बेरहमी के नतीजे हैं।
आज अगर हमारे देश में,
अमीरों के घर निवाले फेके न जाते।
ज्यादा स्टोर करके रखें ना जाते।...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           वो लम्हे जो कभी दिल को अता सुकूँ करते थे,
वही अब रूह में मेरी ख़लिश भरा करते हैं।
मचलती थी जहाँ खुशबू महकते ख़्वाब की हरदम,
वही यादें अब आँखों में धुआँ भरा करती हैं।

जिन्हें हम ज़िन्दगी कहते थे, वो अब सिर्फ़ किस्से हैं...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           हर इक मोहल्ला हर इक गली
हर इक शहर हर इक गांव
एक जैसे लगते है मुझे
वही भीड़ - भाड़
वही भागम - भाग
हर कोई अजनबी हर किसी से
किसको किसकी नहीं पड़ी
बस इक रफ़्तार से दौड़ती ज़िंदगी
न पहले जैसे भाव बाक...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           ख्वाबों मे तुम्हे सजाया,
सपनो मे पिरोया,
बिन तुझे देखे अपनी दिल की चाहत बनाया,
लेकिन तुमने भी मोहब्बत खूब निभाया,
वो पाक मोहब्वत वो इश्क का खूबसूरत मंजर,
जो मेरे एहसासों मे सदैव जीवंत रहा,
जिसे देखकर खुदा भी...और पढ़ें
2 hours ago
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