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                                                                           रात सुबह की ओर चल पड़ी थी
नींद उसकी आँखों में भी नहीं थी
और मेरी आँखों में भी नहीं

फर्क बस इतना था
कि मुझे उसका इंतज़ार था
और उसका किसी और से करार था…...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           नफ़रती इंसान से नाता नहीं
घृणा फैलाना मुझे आता नहीं

मान - मर्यादा जो धोकर पी चुका
बेशरम इंसान शरमाता नहीं

कर चुका ईमान का सौदा हो जो
बोलने में झूठ सकुचाता नहीं

दिल नहीं सीने में हो जिस...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           कविताएँ
हमेशा भीतर से फूट निकलती हैं,
मजबूत चट्टानों के बीच
छिपकर बहते झरनों की तरह।

लेकिन जीवन,
ओ जीवन!
क्यों तुम मेरे सामने
एक सूखी नदी की पाट-सी पड़ी हो?

शब्दों में हरियाली है...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           रात मीठी चांदनी है,
मौन की चादर तनी है,

एक चेहरा? या कटोरा सोम मेरे हाथ में
दो नयन? या नखतवाले व्योम मेरे हाथ में?

प्रकृति कोई कामिनी है?
या चमकती नागिनी है?

रूप-सागर कब किसी की चाह मे...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           
राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में
और खुल जाएँगे दो चार मुलाक़ातों में

ये भी तुम जानते हो चंद मुलाक़ातों में
आज़माया है तुम्हें हम ने कई बातों में

ग़ैर के सर की बलाएँ जो नहीं लें ज़ालिम
क्...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           मैंने इन दो आंखों से
जाने कितनी
आत्म हत्याएं देखी हैं।
पर ये हत्याएं मनुष्य की
नहीं होती ;उसके मन की होती है।
आपने भी तो मारा होगा
कई बार अपने मन को
लेकिन कब??

कभी अपनों के लिए,
त...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           
रोटी बेलकर उसने तवे पर बिछाई
और जिस समय उसे पलट देना था रोटी को
ठीक उसी समय एक लड़की का फ़ोन आ गया.
वह देर तक भूले रहा रोटी पलटना
मैं वही रोटी हूँ
एक तरफ़ से कच्ची, दूसरी तरफ़ से जली हुई।

उस स...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           फिर इक ख़बर में ये एलान ख़ूबसूरत है
कि एक फ़र्म को कुछ चोरों की ज़रूरत है
कुछ ऐसे चोर जो चोरों की देख-भाल करें
जो पासबाँ के फ़राएज़ का भी ख़याल करें

ख़बर में इस की वज़ाहत न कर सका अख़बार
कि कैसे चोर हैं मज़क...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           भावना सतत परिवर्तनशील है।
- सुरेंद्र वर्मा 
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17 hours ago
                                                                           
क़ुर्बत भी नहीं दिल से उतर भी नहीं जाता
वो शख़्स कोई फ़ैसला कर भी नहीं जाता

आँखें हैं कि ख़ाली नहीं रहती हैं लहू से
और ज़ख़्म-ए-जुदाई है कि भर भी नहीं जाता

वो राहत-ए-जाँ है मगर इस दर-बदरी में
...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- सुयश, जिसका अर्थ है- अच्छा यश, अच्छी कीर्ति, यशस्वी। प्रस्तुत है बालस्वरूप राही की कविता- प्यास के क्षण 

बाँट दो सारा समंदर तृप्ति के अभिलाषकों में,
मैं अंगारे से दहकते प्यास...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           चारों ओर से प्रशंसा हो और अखबार में भी इनके नाम के हेडिंग छपे मोटी मोटी,
एक भी इन पर न सवाल दागा जाए और न ही इनको सुनाया जाए खरी खोटी,
सचमुच इन भ्रष्ट नेताओं की ये मंशा यदि पूरी हो जाती है तो इस देश की जनता,
की प्रत्येक समस्या को...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           आँखों में समंदर,
और होठों पर मुस्कान है,
ज़िन्दगी की हर मुश्किल का,
सब्र ही तो समाधान है।

थक कर बैठना मंज़ूर नहीं,
हार कर रोना काम नहीं,
तूफ़ानों में जो कश्ती पार लगा दे,
उसी हुनर का नाम सब्र ह...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           जो रचनाएँ किसी के मौन में
फूलती-फलती हैं,
जो दर्द के पिघलने से
कविता का आकार
लेकर चलती हैं,
उन्हें नहीं चाहिए होता है छंदों का बंधन,
लय का आधार;वे स्वतः ही बड़ी हो जाती हैं।

जो रचनाएँ
रा...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           
अपना दिल पेश करूँ अपनी वफ़ा पेश करूँ
कुछ समझ में नहीं आता तुझे क्या पेश करूँ

तेरे मिलने की ख़ुशी में कोई नग़्मा छेड़ूँ
या तिरे दर्द-ए-जुदाई का गिला पेश करूँ

मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           धर्म पूछ कर गोली मारी.!
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धर्म पूछ कर गोली मारी.!
शैतानों की हरकत कारी ||
इनका कोई दीन नहीं है |
हिंसा इनको सब से प्यारी ||

इनमें खूब भरी है नफरत|
अमन चैन से इन्ह...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           जिस दिन कॉलेज और यूनिवर्सिटी के मंचों पर
छात्र संघ अध्यक्ष कौन बनेगा, कि जगह भारत के लिए क्या बनाओगे कि चर्चा होगी।

जिस दिन चौक चौराहों पर नौजवान कि भीड़
भौकाल मारपीट और सत्ता कि बगावत के लिए नहीं,
बल्कि नई सोच विच...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           "मैं ठीक हूँ..." 🥀
हर सवाल पर हँसकर मैंने, बस इतना ही कहा है— "मैं ठीक हूँ..."
जब-जब दिल चुपके से टूटा, तब-तब यही लिखा है— "मैं ठीक हूँ..."
चेहरे पर मुस्कान सजा ली, आँखों को समझा लिया। दर्द ने जब आवाज़ लगाई, ख़ामोशी को अपना लिया।और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           रफ़ता रफ़ता न मुझको सता ज़िन्दगी।
मैं जियूँ कैसे तुझको..? बता ज़िंदगी।

हादसों में रहा मुब्तला....., हर समय,
एक पल को खुशी कर अता ज़िंदगी..!

मुद्दतें हो गईं........, तुझको' रूठे हुए,
क्या हुई मुझसेऔर पढ़ें
17 hours ago
                                                                           हम भी कभी हरे- भरे थे,बसंत संग झूमते -गाते थे,
पंछियों के आशियाने थे,हम भी हंसते-मुस्कुराते थे।

अब,सलिल के हृदय पर खड़े, हम मौन पड़े पहरेदार हैं,
थे कभी आसमां पर, अब बस पुरानी यादों के म़जार है।

न पल्लव की...और पढ़ें
16 hours ago
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