रात सुबह की ओर चल पड़ी थी
नींद उसकी आँखों में भी नहीं थी
और मेरी आँखों में भी नहीं
फर्क बस इतना था
कि मुझे उसका इंतज़ार था
और उसका किसी और से करार था…...और पढ़ें
नफ़रती इंसान से नाता नहीं
घृणा फैलाना मुझे आता नहीं
मान - मर्यादा जो धोकर पी चुका
बेशरम इंसान शरमाता नहीं
कर चुका ईमान का सौदा हो जो
बोलने में झूठ सकुचाता नहीं
दिल नहीं सीने में हो जिस...और पढ़ें
कविताएँ
हमेशा भीतर से फूट निकलती हैं,
मजबूत चट्टानों के बीच
छिपकर बहते झरनों की तरह।
लेकिन जीवन,
ओ जीवन!
क्यों तुम मेरे सामने
एक सूखी नदी की पाट-सी पड़ी हो?
शब्दों में हरियाली है...और पढ़ें
रात मीठी चांदनी है,
मौन की चादर तनी है,
एक चेहरा? या कटोरा सोम मेरे हाथ में
दो नयन? या नखतवाले व्योम मेरे हाथ में?
प्रकृति कोई कामिनी है?
या चमकती नागिनी है?
रूप-सागर कब किसी की चाह मे...और पढ़ें
राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में
और खुल जाएँगे दो चार मुलाक़ातों में
ये भी तुम जानते हो चंद मुलाक़ातों में
आज़माया है तुम्हें हम ने कई बातों में
ग़ैर के सर की बलाएँ जो नहीं लें ज़ालिम
क्...और पढ़ें
मैंने इन दो आंखों से
जाने कितनी
आत्म हत्याएं देखी हैं।
पर ये हत्याएं मनुष्य की
नहीं होती ;उसके मन की होती है।
आपने भी तो मारा होगा
कई बार अपने मन को
लेकिन कब??
कभी अपनों के लिए,
त...और पढ़ें
रोटी बेलकर उसने तवे पर बिछाई
और जिस समय उसे पलट देना था रोटी को
ठीक उसी समय एक लड़की का फ़ोन आ गया.
वह देर तक भूले रहा रोटी पलटना
मैं वही रोटी हूँ
एक तरफ़ से कच्ची, दूसरी तरफ़ से जली हुई।
उस स...और पढ़ें
फिर इक ख़बर में ये एलान ख़ूबसूरत है
कि एक फ़र्म को कुछ चोरों की ज़रूरत है
कुछ ऐसे चोर जो चोरों की देख-भाल करें
जो पासबाँ के फ़राएज़ का भी ख़याल करें
ख़बर में इस की वज़ाहत न कर सका अख़बार
कि कैसे चोर हैं मज़क...और पढ़ें
भावना सतत परिवर्तनशील है।
- सुरेंद्र वर्मा
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क़ुर्बत भी नहीं दिल से उतर भी नहीं जाता
वो शख़्स कोई फ़ैसला कर भी नहीं जाता
आँखें हैं कि ख़ाली नहीं रहती हैं लहू से
और ज़ख़्म-ए-जुदाई है कि भर भी नहीं जाता
वो राहत-ए-जाँ है मगर इस दर-बदरी में
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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- सुयश, जिसका अर्थ है- अच्छा यश, अच्छी कीर्ति, यशस्वी। प्रस्तुत है बालस्वरूप राही की कविता- प्यास के क्षण
बाँट दो सारा समंदर तृप्ति के अभिलाषकों में,
मैं अंगारे से दहकते प्यास...और पढ़ें
चारों ओर से प्रशंसा हो और अखबार में भी इनके नाम के हेडिंग छपे मोटी मोटी,
एक भी इन पर न सवाल दागा जाए और न ही इनको सुनाया जाए खरी खोटी,
सचमुच इन भ्रष्ट नेताओं की ये मंशा यदि पूरी हो जाती है तो इस देश की जनता,
की प्रत्येक समस्या को...और पढ़ें
आँखों में समंदर,
और होठों पर मुस्कान है,
ज़िन्दगी की हर मुश्किल का,
सब्र ही तो समाधान है।
थक कर बैठना मंज़ूर नहीं,
हार कर रोना काम नहीं,
तूफ़ानों में जो कश्ती पार लगा दे,
उसी हुनर का नाम सब्र ह...और पढ़ें
जो रचनाएँ किसी के मौन में
फूलती-फलती हैं,
जो दर्द के पिघलने से
कविता का आकार
लेकर चलती हैं,
उन्हें नहीं चाहिए होता है छंदों का बंधन,
लय का आधार;वे स्वतः ही बड़ी हो जाती हैं।
जो रचनाएँ
रा...और पढ़ें
अपना दिल पेश करूँ अपनी वफ़ा पेश करूँ
कुछ समझ में नहीं आता तुझे क्या पेश करूँ
तेरे मिलने की ख़ुशी में कोई नग़्मा छेड़ूँ
या तिरे दर्द-ए-जुदाई का गिला पेश करूँ
मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में...और पढ़ें
धर्म पूछ कर गोली मारी.!
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धर्म पूछ कर गोली मारी.!
शैतानों की हरकत कारी ||
इनका कोई दीन नहीं है |
हिंसा इनको सब से प्यारी ||
इनमें खूब भरी है नफरत|
अमन चैन से इन्ह...और पढ़ें
जिस दिन कॉलेज और यूनिवर्सिटी के मंचों पर
छात्र संघ अध्यक्ष कौन बनेगा, कि जगह भारत के लिए क्या बनाओगे कि चर्चा होगी।
जिस दिन चौक चौराहों पर नौजवान कि भीड़
भौकाल मारपीट और सत्ता कि बगावत के लिए नहीं,
बल्कि नई सोच विच...और पढ़ें
"मैं ठीक हूँ..." 🥀
हर सवाल पर हँसकर मैंने, बस इतना ही कहा है— "मैं ठीक हूँ..."
जब-जब दिल चुपके से टूटा, तब-तब यही लिखा है— "मैं ठीक हूँ..."
चेहरे पर मुस्कान सजा ली, आँखों को समझा लिया। दर्द ने जब आवाज़ लगाई, ख़ामोशी को अपना लिया।और पढ़ें
रफ़ता रफ़ता न मुझको सता ज़िन्दगी।
मैं जियूँ कैसे तुझको..? बता ज़िंदगी।
हादसों में रहा मुब्तला....., हर समय,
एक पल को खुशी कर अता ज़िंदगी..!
मुद्दतें हो गईं........, तुझको' रूठे हुए,
क्या हुई मुझसेऔर पढ़ें
हम भी कभी हरे- भरे थे,बसंत संग झूमते -गाते थे,
पंछियों के आशियाने थे,हम भी हंसते-मुस्कुराते थे।
अब,सलिल के हृदय पर खड़े, हम मौन पड़े पहरेदार हैं,
थे कभी आसमां पर, अब बस पुरानी यादों के म़जार है।
न पल्लव की...और पढ़ें