'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- भृंग, जिसका अर्थ है- भौंरा , भ्रमर। प्रस्तुत है गोपाल सिंह नेपाली की कविता- चंदा का प्यार चकोरों तक
मैं प्यासा भृंग जनम भर का
फिर मेरी प्यास बुझाए क्या,
दुनिया का प्या...और पढ़ें
तुम दलबदलू यार, तुम्हारे जलवे हैं
कुर्सी पर हर बार, तुम्हारे जलवे हैं
राजनीति से पहले इकदम पैदल थे
अब दर्जन-भर कार, तुम्हारे जलवे हैं
मरघिल्ले थे तुम अब सेहतमंद हुए
लोकतंत्र बीमार, तुम्हारे जलवे हैं...और पढ़ें
ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए
इस मेरी तबाही में तिरा नाम न आए
ये दर्द है हमदम उसी ज़ालिम की निशानी
दे मुझ को दवा ऐसी कि आराम न आए
काँधे पे उठाए हैं सितम राह-ए-वफ़ा के
शिकवा मुझे तुम से है कि दो...और पढ़ें
योग्य पुरुषों के लिए कोई भी कार्य अत्यंत कठिन नहीं होता, उद्योगी मनुष्यों के लिए कोई स्थान दूर नहीं होता, विद्वानों के लिए कोई देश, विदेश नहीं होता और प्रिय वचन बोलने वालों के लिए कोई व्यक्ति पराया नहीं होता।
~ चाणक्य
हम...और पढ़ें
रात से जंग कोई खेल नईं
तुम चराग़ों में इतना तेल नईं
आ गया हूँ तो खींच अपनी तरफ़
मेरी जानिब मुझे धकेल नईं
जब मैं चाहूँगा छोड़ जाऊँगा
इक सराए है जिस्म जेल नईं
बेंच देखी है ख़्वाब में ख़ा...और पढ़ें