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                                                                           हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - विधु जिसका अर्थ है 1. चंद्रमा 2. कपूर 3. ब्रह्मा। कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

वर वनिता है नहीं अति कलित कुंतल वाली।
भुवन-मोहिनी-काम-क...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           
कैसे मानूँ कि ज़माने की ख़बर रखती है
गर्दिश-ए-वक़्त तो बस मुझ पे नज़र रखती है

मेरे पैरों की थकन रूठ न जाना मुझ से
एक तू ही तो मिरा राज़-ए-सफ़र रखती है

धूप मुझ को जो लिए फिरती है साए साए
है तो...और पढ़ें
5 hours ago
                                                                           
ख़िज़ाँ के ज़ख़्म हवा की महक से भरने लगे
निगार-ए-गुल के ख़द-ओ-ख़ाल फिर निखरने लगे

ये सूखे सहमे शजर देख मार्च आने पर
तेरे बदन की तरह शाख़ शाख़ भरने लगे

ग़म-ए-हयात फिर आने लगी सदा-ए-जरस
दयार-ए...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           
सरल रेखाओं में चलती ज़रूर है
लेकिन उतनी सरल होती नहीं
इंद्रधनुष में किस सफ़ाई से देती है
अपने लचीले होने का एहसास
जबकि वहाँ भी वह सीधी रेखाओं में ही
चल रही होती है
तरंग हूँ तरंग हूँ कहती हुई
कण...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           मुख को ही हँसाने वाली मित्रता कोई मित्रता नहीं है। हृदय को आनंदित करने वाली मित्रता ही मित्रता है।
- तिरुवल्लुवर 
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20 hours ago
                                                                           
कहा था किस ने कि अहद-ए-वफ़ा करो उस से
जो यूँ किया है तो फिर क्यूँ गिला करो उस से

नसीब फिर कोई तक़रीब-ए-क़़ुर्ब हो कि न हो
जो दिल में हों वही बातें कहा करो उस से

ये अहल-ए-बज़्म तुनुक-हौसला सही फिर भी...और पढ़ें
5 hours ago
                                                                           हिंदी की वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया को साल 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। ममता कालिया को यह पुरस्कार उनके संस्मरण 'जीते जी इलाहाबाद' के लिए दिया गया है। साहित्य अकादमी की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अकादमी द्व...और पढ़ें
                                                
1 hour ago
                                                                           तुम से दूर जाने के लिए मजबूर कर दिया, तुम ने मुझे,
मुझे तुम्हारी गुस्से, नखरे,रुठ जाने से भी मुहब्बत है...और पढ़ें
49 minutes ago
                                                                           मेरे ख्वाबों का इक सिर तुम्हारे पास है
आधा मैं बिनु तुम आधा बिन दोगे न
बड़ा नर्म ओ नाज़ुक है दिल मेरा
दिल की ख्वाहिश तुम पूरी कर दोगे न...और पढ़ें
50 minutes ago
                                                                           मेरा दोस्त
मुझे से छुट रहे हैं,
शहर आएं दो हाथ, कलम व आंख ,
सब कुछ  ले के....
फिर से  घर को  लौट जा रहे हैं ,,
कितनी  कर्जदार होंगी ए शहर
तुने मौत उसके हाथों में दे दिया

ए शहर तुझे से शिकायत हैऔर पढ़ें
25 minutes ago
                                                                           सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने  अपने गुरु आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को याद करते हुए कहा, "पंडित जी का पूरा साहित्य और आलोचना शोध पर आधारित है। वे सदैव अपने छात्रों को शोध की गहराई में उतरने के लिए प्रेरित करते थे। उनका मानना था कि...और पढ़ें
                                                
1 hour ago
                                                                           लोगों के अब पुराने व्यवहार नहीं मिलते।
तुम कहते हो त्योहारों पर हम क्यों नहीं मिलते।।
-विपिन सिंह विरा...और पढ़ें
50 minutes ago
                                                                           मां जमीन है तो पिता आसमान है
मेरे पिता ही मेरे भगवान् हैं
उनकी मुस्कुराहट पर जीवन कुर्बान हैं
वही मेरे धन है, वही मान है, सम्मान है
मेरे अस्तित्व की पहचान है
मेरे पिता ही मेरे भगवान् है
संतान की खुशियों के लि...और पढ़ें
39 minutes ago
                                                                           कैसी निःशब्दता
कैसी ये पीर है
व्याकुल हैं नैन भी
मन भी अधीर है
घायल जो कर गया
हमें वो तेरे
लफ़्ज़ों का तीर है
बरसे तेरे वियोग में
नैनो से नीर है
जग से विरक्ता
जीवन विवशता
हृ...और पढ़ें
57 minutes ago
                                                                           मेरे रोम रोम में राम है कण कण में घनश्याम हैं
जीवन में हैं प्राण में हैं, हर क्षण में हैं हर एहसास में हैं
मेरी हर एक आश में हैं, जीवन के हर पल खास में हैं
कैसे कहूं कि
मेरे रोम रोम में राम हैं कण कण में घनश्याम हैं
...और पढ़ें
39 minutes ago
                                                                           मनुष्यों के पास
होती हैं
पांच नहीं
बल्कि दस इंद्रियां
इनमें से पांच ज्ञानेंद्रियां
और पांच होती हैं
कर्मेंद्रियां
मिला लें इनके साथ
यदि मन को भी
तो हो जाती है
कुल इंद्रियों की संख्...और पढ़ें
40 minutes ago
                                                                           हकीक़त को छुपाया जा रहा है
सभी को बरगलाया जा रहा है
बहारों को बुलाया जा रहा है
मगर गुलशन उजाड़ा जा रहा है
जहां से हम बचा लाए थे इसको
दिल ए गाफिल दोबारा जा रहा है
जड़ें इस पेड़ की गहरी बहुत हैं
करीने से उ...और पढ़ें
51 minutes ago
                                                                           मुंह पर लगाना लगाम
है एक बहुत बड़ा काम
जिसने लगाया लगाम
मिलता उसको सलाम
करता काम वह तमाम
कमाता है वह नाम।
- सहज कुमार...और पढ़ें
39 minutes ago
                                                                           चिड़ियों की बात निराली
बैठ जाती डाली डाली
रोके ना उसको हवा तूफानी
आसमान की है वह दीवानी

पंख खोल के उड़ना जानती
कभी ना वह डरना जानती
निडरता की पाठ पढ़ी है
कभी ना वह हार मानती

सुबह...और पढ़ें
41 minutes ago
                                                                           करो प्रकाशित जीवन का हर दृश्य तुम्हारी आंखों में!
अगर हो हार तुम्हारी आंखों में तो है जीत तुम्हारी आंखों में
अगर हो डर तुम्हारी आंखों में,, तो है साहस तुम्हारी आंखों में।
करो प्रकाशित जीवन का हर दृश्य तुम्हारी आंखों में,,
...और पढ़ें
56 minutes ago
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