मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं
हाए मौसम की तरह दोस्त बदल जाते हैं
हम अभी तक हैं गिरफ़्तार-ए-मोहब्बत यारो
ठोकरें खा के सुना था कि सँभल जाते हैं
वो कभी अपनी जफ़ा पर न हुआ शर्मिंदा
हम समझते रह...और पढ़ें
आईए हमारे गया में
पीपल के शीतल छाया में
बुद्ध के गया में
गयासुर के गया में
सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'के गया में
जहां की माटी में है खुशबू हिंदुस्तान की
ज्ञान आसमान की
है धरती भगवान की
ह...और पढ़ें
किससे क्या मिला किसने क्या छीना।
ऐसे विचारों के घेरे में आज मत गंवाना।।
छोटी-छोटी खुशी को दरकिनार न कर।
जो मिला नसीब से उस पर मुस्कुराना।।
जिसकी साँसों में घुलकर उजाला देखा।
उससे तकरार करना मगर मत ठु...और पढ़ें
बड़ा आसान है बातें बनाना,
शतरंज के नाकाम हुए मोहरे पर।
अच्छा कर लेते हैं विश्लेषण,
हम हारे हुए लाचार जुआरी पर!
ख़ुद कुछ किया नहीं जीवन में,
वे ही बजाते हैं भीड़ में तालियाँ।
बहाया जिसने पसीना संघर्ष म...और पढ़ें
परंपरा और विद्रोह, जीवन में दोनों का स्थान है। परंपरा घेरा डालकर पानी को गहरा बनाती है। विद्रोह घेरों को तोड़कर पानी को चोड़ाई में ले जाता है। परंपरा रोकती है, विद्रोह आगे बढ़ना चाहता है। इस संघर्ष के बाद जो प्रगति होती है, वही समाज की असली प्रगति है...और पढ़ें
कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते
जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते
लहू था तमन्ना का आँसू नहीं थे
बहाए न जाते तो हरगिज़ न बहते
वफ़ा भी न होता तो अच्छा था वअ'दा
घड़ी दो घड़ी तो कभी शाद रहते
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ज़मीं पाँव नीचे न सर आसमाँ
मुहब्बत की बस्ती बसाएं कहाँ
नशे मन पे कैसी ये बिजली गिरी
नहीं आग का कोई नाम-ओ-निशाँ
मेरे पास तुमको मिलेगा भी क्या
ख़ला दिल जिगर है ख़ला है मकाँ
न तोड़ो यूं ग...और पढ़ें
दिल के दो हिस्से
दिल के बस, दो हिस्से हैं।
पर उसके
प्यार के अनेक किस्से हैं।
किसी ने उसे
जिन्दगी भर निभा लिया।
तो किसी ने उसे
बीच, राहों में छोड़ दिया।
किसी ने उसे भुला दिया।
तो क...और पढ़ें
कहते हैं सभी
कि मोहलत ज़िंदगी की
मिली है सभी को
ब्रह्मा से ही
लेकिन मोहलत ज़िंदगी की
करता है तय कभी
देश का कानून भी
सोचिए, गुज़रती क्या होगी
उस शख्स पर
जिसकी ज़िंदगी की तार
टूटने की मो...और पढ़ें
उंगलियाँ मुझपे जो सरकार उठा देते हो
और बेहतर मेरा किरदार बना देते हो
जाम में ज़ह को चुपके से मिला देते हो
उम्र लम्बी हो मेरी ये भी दुआ देते हो
रास्तों पर मेरे कांटों को बिछाने वालो
तुम मेरे पैरों की...और पढ़ें
ज़िंदगी के मायने समझने की
साथ में दो कदम चलने की
अब जरूरत नहीं लगती
गलत को जायज ठहराने की
हर बात पर हामी भरते जाने की
अब जरूरत नहीं लगती
इंतजार में रातों को जागने की
उलझ...और पढ़ें
हर नग़मों की अपनी चमक, अपनी कोई खनक होती है,
तेरे रुख़सार की इस ख़ामोशी में, फिर कमी किस बात की होती है।
तेरे चेहरे पे वो पुरानी-सी रौनक, नज़र क्यों नहीं आती,
किस धुन की कोई टूटी कड़ी, अब तक तुझे सताती?
क्य...और पढ़ें
धरती पर आगमन होते ही
एक हलचल और हुंकार हुआ।
तूफान सा तीव्र जब धार हुआ,
सागर जैसा आकार हुआ,
हर हर गंगे का जयकार हुआ।
गंगा का जब विस्तार हुआ,
धरती का ये उपहार हुआ।
गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज...और पढ़ें
ग़ज़ल
बे सबब यूँ ही नहीं शिकवा करो
कुछसमझकर सोच करबोलाकरो
गर फ़तहयाबी यक़ीनी चाहते
दूर तक पहले ज़रा सोचा करो
साथ मिलने से बड़ी राहत रहे
काम कोई भी नहीं तन्हा करो
ठोस पान...और पढ़ें
बचपन की यादें हैं
वो पुरानी ख्वाब हैं
वो बीत गया हाँ बीत गया
सुख का सूरज बीत गया
बीत गयी यु खुशियों भरी रात
बीत गया सपनों का अरमान
बीत गयी वो पुरानी मौज
यु बीत गयी यु पुरानी बचपन की भेद भाँत
यु...और पढ़ें
हिमगिरि ने शंख बजाया,
तब स्वर्ग-नदी को आना था।
भगीरथ के अटल तप से,
फिर धरती का दुख मिटाना था।
सगर-सुतों की राख पुकारे,
अब उन्हें मुक्ति दिलवानी थी।
पीढ़ी-पीढ़ी आस अधूरी,
तब गंगा धरा पर लानी थी।
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ये खुरदरापन, ये सिमटते रिश्ते, व्यस्तता की सनक और रुपयों खनक।
सिर्फसपने देखना नहीं उन्हेंआकार देना चाहते हैं,
अब खरीदार नहीं स्वयं बाज़ार होना चाहते हैं!
उजालों को निगल कर रात होना चाहते हैं,
शांति बन में शोर का उन्माद होन...और पढ़ें
यक़ीन मानो
जब तुम्हें कोई इज़हार करें
दिल दे बैठे,और प्यार करें
उम्मीद दिलाए साथ रहेंगे
तो क्या होगा?
यक़ीन मानो
रहे हमेशा हर पल यूँ ही
बात बात पर यूँ ही हँसाए
शाम ढले कभी बाहों तले...और पढ़ें
वक़्त कभी किसी के सिकन्जे में नहीं रहता।
वो अपना सिकन्जा खुद बनाता है।
वक़्त कभी तो नासूर बन जाता।
कभी मलहम का काम भी करता।
इसलिए वक ही हमेशा गलत नहीं होता।
कई बार किस्मत और हालात भी...और पढ़ें
नज़रों की अनकही बात
वो देखता है मुझे, मगर बेहया नहीं,
मैं देखने लगूँ उसे, तो वो देखता नहीं।
उसकी नज़रें मुझ पर ठहरती तो हैं,
मगर मिलते ही जैसे डर जाती हैं कहीं।
कोई राज़ है उसकी खामोशी में...और पढ़ें