इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं
जिधर देखता हूं, गधे ही गधे हैं

गधे हँस रहे, आदमी रो रहा है
हिन्दोस्तां में ये क्या हो रहा है ...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           चलो दिलदार चलो 
चांद के पार चलो
हम हैं तैयार चलो...'

पाकीज़ा फ़िल्म के इस मशहूर गीत को क़लमबंद करने वाले शायर और गीतकार कैफ़ भोपाली को मुशायरों की रौनक़ कहा जाता था, वह आम चलन से हटकर शेर कहते थे। जिस मुशायरे में कैफ़और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर 
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए 
- सज्जाद बाक़र रिज़वी

रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को 
मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी 
- जलील मानिकपूरी...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           मरीज़-ए-ग़म के सहारो कोई तो बात करो 
उदास चाँद सितारो कोई तो बात करो 

कहाँ है डूब चुका अब तो डूबने वाला 
शिकस्ता-दिल से किनारो कोई तो बात करो 

मिरे नसीब को बर्बादियों से निस्बत है 
लुटी हुई सी बहारो...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           लगाकर दिल पे हर बात को रोया नही करते,
छोटी छोटी बातो पर रिस्ता तोड़ा नही करते।

लाख मुस्किले सही गर्दीश ए वक्त में,
मगर कभी जिन्दगी से मायूस हुआ नही करते।

हवाओं से उलझकर भी कुछ दीये जगमगाते रहते हैं,
क...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           जब उड़ोगे तब जानोगे 
कि जाने कब से हो तुम
ज़िदगी के पिंजरे में।

चलोगे तब पता चलेगा
कि पैरों में पड़ी हैं 
जाने कितनी मजबूरियों की बेड़ी।

जगोगे तब समझोगे
कि अब तक जिसे समझे थे हक़ीक़त...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           गणतंत्र दिवस के अवसर पर 25 जनवरी 2022 शाम 6 बजे अमर उजाला काव्य कैफ़े ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।  इसका प्रसारण अमर उजाला, अमर उजाला काव्य के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल से लाइव किया जाएगा। तो आप भी आइए और ऑनलाइन तरीके से दर्शक बनिए इस...और पढ़ें
                                                
11 hours ago
                                                                           रास्तों पर अगर कहीं हम मिल गएं तो
वो हसीन नज़रें झुकाना याद आया

उन अदाओं से किया क़ातिल मुझे था
हल्के-हल्के दिल चुराना याद आया

रात-भर करते थे बातें कॉल पर हम
फ़िर वही किस्सा पुराना याद आया
...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           ```रिश्ता क्या है तेरा मेरा
समझ नहीं पाती
साथ रह नहीं सकती
और दूरियाँ सही नहीं जाती
दिल चाहता है बताना तुझको
कितना है ज़रूरी तेरा साथ मुझको
पर क्या करूँ हालात ऐसे हैं...
तुझको मेरी मजबूरी दिखाई नहीं देऔर पढ़ें
8 hours ago
                                                                           जिस का है सब को ज्ञान यही है 
सारे जहाँ की जान यही है 
जिस से है अपनी आन यही है 

मेरा निवास स्थान यही है 
प्यारा हिन्दोस्तान यही है 

हँसता पर्बत हँसमुख झरना 
पाँव पसारे गंगा जमुना 
गोदी...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- जनतंत्र, जिसका अर्थ है- एक शासन प्रणाली जिसमें जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि शासन चलाते हैं। प्रस्तुत है रामधारी सिंह दिनकर कविता- मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है

सदिय...और पढ़ें
52 minutes ago
                                                                           मैं जो तन्हा रह गया ज़िंदगी में
इसमें तुम्हारा कुसूर क्या है
एक तू ही जब न मिला मुझे
तो सब चीज़ें नूर क्या हैं

तख़ईल की राहें तय करते करते
खुद मुबहम-सा बन गया हूँ
हर तरफ़ ढूंढती हैं नज़र तुम्हें
...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो

इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बँधाए,
कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,
इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,
और इन्हें झटके देने में कितनों...और पढ़ें
12 hours ago
                                                                           हाँ, यही तो पहला प्यार हुआ
हाँ, यही तो अब इजहार हुआ
न लिखा कोई प्रेमपत्र
ना ही मुख की वाणी से
बस नजरों में ही प्यार हुआ
एहसास जगाकर दिल में अपने
दुनियाँ में अधियार हुआ
न जाने कैसे ये इकरार हुआ
ज...और पढ़ें
12 hours ago
                                                                           '' हिंदी की राह में कठिनाइयां अवश्य हैं किन्तु उसका भविष्य उज्ज्वल है। आज बहुत सी ऐप आ गये हैं, टेक्नोलॉजी के नए क्षेत्र खुल रहे हैं जिसके माध्यम से हम हिंदी को फैला सकते हैं।'' ये बातें भारतीय दूतावास नीदरलैंड्स के राजदूत प्रदीप कुमा...और पढ़ें
                                                
13 hours ago
                                                                           
इधर उधर जो चराग़ टूटे पड़े हुए हैं
सलाम इनको, ये आंधियों से लड़े हुए है

दिखा रहे है हमें जो, अपना फुला के सीना
हमें पता है ये किस के बल पर खड़े हुए हैं

गले मिलने की सुलह की हो पहल किधर से
अभी...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           रोज़ टूट जाती है,रोज बिखर जाती है।
पर फिर भी हमारा साथ नहीं छोड़ती है।

कुछ आशाएं हमारे साथ दौड़ती हैं।
मुश्किलों से लड़ने की ताकत है।
काफी कुछ सहने की हिम्मत है।
कभी किसी से रूठ जाओ तो,
उससे मिलने की...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           अमर जवान ज्योति


आज शहीदों के लिए जल रही
ज्योत भी तुझे लग रही भारी,
क्या कसूर है उन मासूमों का
जिनकी टूट गई उम्मीदें सारी?

पचास साल पुरानी वो ज्योत,
पावन थी और बड़ी थी न्यारी,
इत...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           एक दिन यूं ही खामोश बैठे,
ज़िंदगी के पन्नो को पलट कर देखने लगा,
कि क्या वो दिन थे,
जब कोई फिक्र नहीं था ।।

ये सोच कर आंखों में आंसू आने लगे,
कि जो बीत गया,
वो मेरा अतीत था,
भविष्य में जिसका कोई...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           हर दुःख की कहानी लिखते हैं,
कभी मोहब्बत, कभी जुदाई,
कभी मेहरबानी लिखते है,
सच यही है, यहाँ हर कोई, अपना ख़्वाब,
और अपने दर्द की रवानी लिखते हैं।।
जज़्बात रह जाए अधूरा,
ख़्वाब न हो पूरा,
जब हद से ज्यादा बढ़...और पढ़ें
17 hours ago
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