निर्भय का अर्थ है- जिसे भय या डर न हो या निडर। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- निर्भय। प्रस्तुत है महादेवी वर्मा की कविता: हे मेरे चिर सुन्दर-अपने !

हे मेरे चिर सुन्दर-अपने!

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22 hours ago
                                                                           तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा
- बशीर बद्र 


मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी
- राहत इंदौरी ...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           भूल ना होती अगर कहीं तो ,
झगड़े का अपवाद ना होता।

भूल ना होती अगर कहीं तो,
भाईचारा खास ना होता।
भूल ना होती अगर कहीं तो।।

भूल ना होती अगर कहीं तो,
परंपरा का सार ना होता।

भूल ना...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           कभी तो प्यार से, पूछ लीजिए 
सूखते पौधे को सींच लीजिए ।।
तन्हाई दूर होगी, रंगत आयेगी।
हमसे मिलकर, गुफ्तगू कीजिए ।।
दर्द को तह से, मिटाने की शक्ति।
यदि चाहिए, गुस्ताखी कीजिए ।।
महफूज होंगे, जज्बात तेरे में भी।...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           नदी पर कविता लिखने के लिए 
कवि को नाव होना होता है 
आग पर लिखने के लिए राख 

पानी पर पानी बन कर ही लिखा जा सकता है 
धरती पर लिखने के लिए बीज बनना ज़रूरी है 

आकाश पर कविता लिखने के लिए 
जो पक्षी...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           मैं अब हो गया हूं निढाल
अर्थहीन कार्यों में
नष्ट कर दिए
मैंने
साल-पर-साल
न जाने कितने साल!
और अब भी
मैं नहीं जान पाया
 है कहां मेरा योग?

मैं अब घर जाना चाहता हूं
मैं जंगलों...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           आज मराठी कवि किन्तु या यूँ कहें कि भारतीय कवि दिलीप चित्रे की जन्मतिथि है। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में दिलीप चित्रे साहब ने भारतीय काव्य परिदृश्य पर ना सिर्फ अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई बल्कि अपने विदग्धता, साहस और नवाचार से भारतीय कविता को बदला...और पढ़ें
                                                
13 hours ago
                                                                           निर्दोष यानी दोषरहित या जिसमें कोई दोष न हो या बेक़सूर। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- निर्दोष। प्रस्तुत है आलोक धन्वा की कविता- मैटिनी शो।

प्यार 
पुराने टूटे ट्रकों के पीछे मैंने किया प्यार ...और पढ़ें
12 hours ago
                                                                           मैंने इंसान से इंसानियत का सफ़र देखा है
उस वक्त का भी हूं गवाह और मैंने ये भी ज़माना देखा है

कोई जिक्र न था किसी को की इमदाद का
अब करके थोड़ी सी मदद ज्यादा जताना देखा है

रिश्ते शान थे और दोस्ती फख्र का सबब...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           अपने अस्तित्व को पाने के लिए,
स्वयं को टुकड़ों में तोड़ना होगा।।
भस्म होना होगा.. क्षण भर को,
संचय करने को प्राण ऊर्जा को..
साधने और सधने के लिए..
नियम संयम बहुत जरूरी है।।,
पहुंच कर फिर पलटने पर,
रात...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           छा रही बारिश घनेरी
बढ़ रही है अब अंधेरी
नीलगिर के वृक्ष सुहाने
जैसे बारिश में निकले नहाने
वृक्ष जो कि फैले समूचे
वृक्ष जो 10 गज के ऊंचे

परस्पर जो ठेलते हैं
लगे बारिश में खेलते हैं
बारिश...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           घूमकर दुनिया,देखकर इमारतें,
लौट आता हूं अपने घर।
इमारतें बड़ी आलीशान हैं,
पर उनमें नहीं कोई घर।

महलों को महल रहने दो,
घर को घर कहने दो,
ऊंची इमारतों से डर लगता है,
डर को डर रहने दो।
...और पढ़ें
5 hours ago
                                                                           काका हाथरसी ने हास्य और व्यंग्य के जरिए जीवन को खंगालने की कोशिश की है। उनकी हास्य रचनाएं जीवन के सच को सरल शब्दों में पेश करती हैं। उन्होंने राष्ट्र, समाज, अर्थव्यवस्था, सामाजिक परंपरा, जातिवाद, संप्रदायवाद और अन्य सामाजिक पहलुओं पर खुलकर प्रहार किय...और पढ़ें
                                                
11 hours ago
                                                                           जाने क्यों आज कल अकेले में भी, किसी के होने का एहसास हो रहा है ।
मेरी जिन्दगी में भी शायद, कोई ख़ास हो रहा है ।।
जिसका नाम लब्जों पर आते ही, चेहरे पर एक मुस्कान सी छा जाती है ।
कमबख्त वो नहीं आती, पर उसकी याद आ जाती है ।।
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10 hours ago
                                                                           किसी बड़ी ख़ुशी के इंतज़ार में हम ये छोटी छोटी ख़ुशियों के मौके खो देते हैं
- गुलज़ार (फ़िल्म-बावर्ची)  ...और पढ़ें
8 hours ago
                                                                           नारी तू अबला नहीं, तू नहीं है बेचारी,
तू आधार जगत का, तू ही शक्ति हमारी,
तू पूजा है, तू श्रद्धा है, तू विश्वास जगत का,
तू ही सृष्टि निर्माता है,
हर योद्धा-वीर जगत का, तुझ से ही जीवन पाता है !!
तेरे ना होने से जीवन क...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           तू एक दरिया है, हैं अनगिनत किनारे तेरे
तेरी लहरों में कभी हम भीगे भी होंगे
पर ना बांधा तुझे, ना तेरी ख्वाहिश रखी
बस अपनी ही सीमाओं की पैमाईश रखी
फिर भी ना जाने क्या शिकायत है तुझे
जो हर दिन नई हिदायत है मुझे...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           ख़ूबसूरत होना क्या इतना ज़रूरी है,
मानती हूँ मैं, कि हाँ कुछ हद्द तक तो है!
मगर तन की ख़ूबसूरती का क्या करना,
जब मन ही ख़ूबसूरत न हो!!
हर कोई क्यों है इसके पीछे पीछे,
जब पता है सबको कि यह कर देगा एक दिन हर एक को पीछे...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           मिलता नहीं सहारा कोई
था हमें जान से प्यारा कोई

उम्र जवानी दोनों ढल गये
अब क्या करे इशारा कोई

अम्बर मैं अनगिनत सितारे
मेरे नाम का ना तारा कोई

दुनिया की भीड़ है वैसे
पर नहीं हुआ हम...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           मीठी वाणी बोलो,
मुंह में अपने मिश्री घोलो।
देखो कोयल कैसे गा रही,
जीवन का राग सुना रही।

तुम भी कोयल बन जाओ,
धुन मधुर कोई तुम गाओ ।
सलीका कहने का भी सीखो,
यहां वहां बेवजह मत चीखो।

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10 hours ago
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