Kavya Desk
1:35
                                                                           पराया कौन है और कौन अपना सब भुला देंगे
मता-ए-ज़िंदगानी एक दिन हम भी लुटा देंगे

तुम अपने सामने की भीड़ से हो कर गुज़र जाओ
कि आगे वाले तो हरगिज़ न तुम को रास्ता देंगे

जलाए हैं दिए तो फिर हवाओं पर नज़र रक्खो...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           बशीर रामपुरी हज़रत-ए-दाग़ देहलवी से मुलाक़ात के लिए पहुंचे तो वो अपने मातहत से गुफ़्तगू भी कर रहे थे और अपने एक शागिर्द को अपनी नई ग़ज़ल के अशआ’र भी लिखवा रहे थे। बशीर साहब ने सुख़न गोई के इस तरीक़े पर ताज्जुब का इज़हार किया तो दाग़ साहब ने पूछा, “ख़ां सा...और पढ़ें
                                                
12 hours ago
                                                                           हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही
किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी फिर सही

दिल के लुटने का सबब पूछो न सब के सामने
नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही

नफ़रतों के तीर खा कर दोस्तों के शहर में
हम...और पढ़ें
18 hours ago
                                                                           आसमानों से ज़मीं की तरफ़ आते हुए हम 
एक मजमे के लिए शेर सुनाते हुए हम 

किस गुमाँ में हैं तिरे शहर के भटके हुए लोग 
देखने वाले पलट कर नहीं जाते हुए हम 

कैसी जन्नत के तलबगार हैं तू जानता है 
तेरी लिक्ख...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

बा-हज़ाराँ इज़्तिराब ओ सद-हज़ाराँ इश्तियाक़
तुझ से वो पहले-पहल दिल का लगाना याद है

बार बार उठना उसी जानिब निगाह-ए-शौक़ का
...और पढ़ें
18 hours ago
                                                                           तुम अपने सामने की भीड़ से हो कर गुज़र जाओ
कि आगे वाले तो हरगिज़ न तुम को रास्ता देंगे 


कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िंदगी क्या है
ज़मीं से एक मुट्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे ...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           इतना बड़ा आकाश
मेरी झोली में आ जाए
मैंने बार-बार सोचा था
अब जब
आकाश मेरे पास आ रहा है
तो मेरी झोली
बहुत छोटी हो गई है ।

आकाश को समेटने की इच्छा
हर कोई करता है
किंतु झोली का आकार...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           सफ़ेद हड्डी पे नहीं, ठोस पत्थरों पर ढला हूं,
तू मुझे फक़त गोश्त का लोथड़ा न समझ।

मैं फौलाद हूं, टूटकर भी जुड़ता जाऊँगा,
मेरे दिल को, कांच का खिलौना न समझ।

मेरे भीतर बुलंद तज़ुर्बों का समंदर सोया है,
मुझे...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           आसमान की गहराइयों को उन्मुक्त नापते पक्षियों को देख और पेड़ों की शाखाओं पर बैठे उन्हें चहचहाते सुन किसका मन खुशी से नहीं खिल जाता? दुर्भाग्यवश, बहुत लोग चाव से उन्हें घर में  पिंजरे में कैद कर पालते भी हैं। तोता-मैना जैसे पक्षियों से तो हम बड़े प्यार स...और पढ़ें
                                                
15 hours ago
                                                                           रौशनी से जब हम ठुकराए गये
साथ छोड़कर सब साये गये

मेरी ख़ूबियों का ग़ुरूर टूट गया
जब मेरे ऐब मुझको गिनाए गये

सब क़ुसूर आँखों का था मगर
सब इल्ज़ाम दिल पे लगाए गये

हक़ीक़त में वो फ़क़त सह...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- धधकना, जिसका अर्थ है- आग की लपट के साथ जलना, दहकना, भड़कना, उद्वेलित हो उठना। प्रस्तुत है सुरेश चंद्रा की कविता- जीवन, मरणोत्तर एक क्रियाशील शब्द है  

केतकी!

कल फिर...और पढ़ें
5 hours ago
                                                                           कारवा टूट के रह गया,
समुंदर में किनारा ना मिला,
बे सहारों की इस दुनिया में,
कोई सहारा ना मिला।।

सीमा सूद...और पढ़ें
7 hours ago
                                                                           साथ किसी के रहना लेकिन
खुद को खुद से दूर न रखना।

रेगिस्तानों में उगते हैं
अनबोये काँटों के जंगल,
भीतर एक नदी होगी तो
कलकल कलकल होगी हलचल,
जो प्यासे सदियों से बंधक
अब उनको मजबूर न रखना।
...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           जिन्दगी गुजरती रही, अपना बनाना रह गया।
कोशिशें अब भी जारी, आना जाना रह गया।
जिस रास्ते हम चले, उसे ही सही मानते रहे।
लोग आते जाते रहे, बस साथ चलना रह गया।
जो लकड़ियाँ चुन के लाये, वह गीली निकली।
घर धुआँ से भर गया, बा...और पढ़ें
9 hours ago
                                                                           इंसानियत का एहसास भी
फिर शर्मिंदा होता होगा।
किसी का दर्द अगर तुम्हें
छूकर न गुज़रता होगा ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           सफर हो रात में तो चाँद से आँखें मिला के चल,
सूरज की छाँव में आया तो फिर आँखें झुका के चल

सँभल के चलने वाले सब के सब तो लड़खड़ाये हैं,
सँभल के जो तुम्हे चलना है तो फिर लड़खड़ा के चल

यही चाहत मेरी ना हुस्न को...और पढ़ें
17 hours ago
                                                                           इस क़दर ना- उम्मीद अपनी हयात मत कर
इन हसरतों को दफ़्न करने की बात मत कर
जिंदगी आख़िर जिंदादिली का नाम है बशर
बेसबब मायूसियों में खराब दिनरात मत कर
#बशर...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           पलकों पे बिठाये जाने कितने हमने ख्बाब,
सच हो कल में सारे क्या न्यारे अपने रुबाब,
होंगें फिर उस वक्त के इकलौते हम ही नबाब,
सब आकर कहेंगे हमसे हां जी हां जी जनाब...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           सवाल खुद में फिर एक सवाल बन जाता ।
तेरे सवाल का अगर मैं जवाब बन जाता ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           धरती से उठ कर हम किधर को जाएंगे,
क्या हम भी कल को आसमां हो जाएंगे!
#बशर...और पढ़ें
12 hours ago
X