किसी की आँखों से अपना चेहरा निकालना है
नदी के पानी से ख़ुद को प्यासा निकालना है
उसे कहो तुम कि डोर रिश्तों की सीधी रक्खे
मोहब्बतों की ज़मीं का रक़्बा निकालना है
जो मुस्तहिक़ हो हमारे दिल का क़रीब आए
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दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे
जल्द या देर से मारे तो सभी जाएँगे
सिर्फ़ मैं ही नहीं बाज़ार की मंदी का शिकार
जेब में ले के ख़सारे तो सभी जाएँगे
नद्दियाँ लाशों को पानी में नहीं रखती हैं
तैरें या ड...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अवदात, जिसका अर्थ है-उज्जवल, सफेद, स्वच्छ, निर्मल। प्रस्तुत है महेन्द्र भटनागर की कविता- कौन तुम अरुणिम उषा-सी
कौन तुम अरुणिम उषा-सी मन-गगन पर छा गयी हो ?
लोक-धूमिल र...और पढ़ें
ख्याति न मिलने की कुंठा भीतर-भीतर विरोधी बना देती है।
~देवीशंकर अवस्थी
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प्यार अगर थामता न पथ में उँगली इस बीमार उमर की
हर पीड़ा वेश्या बन जाती, हर आँसू आवारा होता।
निरवंशी रहता उजियाला
गोद न भरती किसी किरन की,
और ज़िंदगी लगती जैसे—
डोली कोई बिना दुल्हन की
दुख से स...और पढ़ें
सचमुच ,
पुल या दीवार का - -
निर्माण ,
एक ही प्रकार से - -
होता है ,
या यों कहे तो - -
एक ही प्रकार के ,
सामग्री से - -
या एक ही प्रकार के,
कच्चे माल से - -
होता है ,
लेकिन...और पढ़ें
दिलासे दिलाए कभी जिंदगी ने
बहाने बनाए कभी जिंदगी ने
कभी फांकों पर ही हमे रखा जिंदा
खजाने लुटाए कभी जिंदगी ने
ये बात और है बेरंग हो गई है
सभी रंग दिखाए हमें जिंदगी ने
हमारी ही होकर,कई पहलू अपने
छिपाए, द...और पढ़ें
मैं तल्ख़ी-ए-हयात से घबरा के पी गया
ग़म की सियाह रात से घबरा के पी गया
इतनी दक़ीक़ शय कोई कैसे समझ सके
यज़्दाँ के वाक़िआ'त से घबरा के पी गया
छलके हुए थे जाम परेशाँ थी ज़ुल्फ़-ए-यार
कुछ ऐस...और पढ़ें
मुक्ति का जब कोई रास्ता नहीं मिला
मैं लिखने बैठ गया हूँ
मैं लिखना चाहता हूँ 'पेड़'
यह जानते हुए कि लिखना पेड़ हो जाना है
मैं लिखना चाहता हूँ 'पानी'
'आदमी' 'आदमी' –...और पढ़ें
सचमुच ,
ईश्वर ने - -
सृष्टि की ,
रचना करते समय - -
तीन चीजें का,
विशेष रुप से - -
रचना या संरचना की ,
अनाज तो पैदा किए - -
लकिन ,
उनके साथ - -
कीड़े भी पैदा किए,
यदि ऐसा...और पढ़ें
हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है
वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है
प्यार की ख़ातिर कुछ भी हम कर सकते हैं
वो तेरी मज़दूरी भी हो सकती है
सुख का दिन कुछ पहले भी चढ़ सकता है
दुख की रात उबूरी भी हो सकती है...और पढ़ें
मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट,
किस्मत का हूँ मारा,
हर जगह दुतकरा जाता,
हर कोई बाय-पास करने की करता कोशिश,
हर कोई नई तरकीब लगाता,
छुटकारा पाने की कोशिश है करता,
मैं हूं फटा हुआ नोट,मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट...और पढ़ें
एक रात उस अजनबी के साथ
मैंने बिताए जो पल,वो रहेगा जिंदगी भर याद।
वो मेरे जुल्फों के पनाहों में था,
मैं उसके बाहों में थी।
आंखों से कुछ कह गया,
वो मुझमें बह गया।
लगा पुरानी जान पहचान,
वो ऐसे मिला
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दिल की हर बात बताऊँ मैं,
क्या दर्द तुम्हें सुनाऊँ मैं।
तुम आँखों से ही समझ लो ना,
जो लफ़्ज़ों से कह न पाऊँ मैं।
ये इश्क़, मोहब्बत, चाहत सब,
कहो तो फिर दोहराऊँ मैं।
रात अभी थोड़ी बाक़ी...और पढ़ें
पड़ी रहेगी अगर ग़म की धूल शाख़ों पर
उदास फूल खिलेंगे मलूल शाख़ों पर
अभी न गुलशन-ए-उर्दू को बे-चराग़ कहो
खिले हुए हैं अभी चंद फूल शाख़ों पर
निकल पड़े हैं हिफ़ाज़त को चंद काँटे भी
हुआ है जब भी...और पढ़ें
रिश्ते शब्दों से नहीं,
एहसासों से ज़िंदा रहते हैं,
जहाँ सच्चा अपनापन हो
वहीं रिश्ते मुकम्मल होते हैं।
-संजय श्रीवास्तव...और पढ़ें
मेरा दिल बार-बार मुझसे,
एक ही सवाल करता है।
हमारे देश के गरीब
सच में, गरीब है?
या अमीरों के बेरहमी के नतीजे हैं।
आज अगर हमारे देश में,
अमीरों के घर निवाले फेके न जाते।
ज्यादा स्टोर करके रखें ना जाते।...और पढ़ें
वो लम्हे जो कभी दिल को अता सुकूँ करते थे,
वही अब रूह में मेरी ख़लिश भरा करते हैं।
मचलती थी जहाँ खुशबू महकते ख़्वाब की हरदम,
वही यादें अब आँखों में धुआँ भरा करती हैं।
जिन्हें हम ज़िन्दगी कहते थे, वो अब सिर्फ़ किस्से हैं...और पढ़ें
हर इक मोहल्ला हर इक गली
हर इक शहर हर इक गांव
एक जैसे लगते है मुझे
वही भीड़ - भाड़
वही भागम - भाग
हर कोई अजनबी हर किसी से
किसको किसकी नहीं पड़ी
बस इक रफ़्तार से दौड़ती ज़िंदगी
न पहले जैसे भाव बाक...और पढ़ें
ख्वाबों मे तुम्हे सजाया,
सपनो मे पिरोया,
बिन तुझे देखे अपनी दिल की चाहत बनाया,
लेकिन तुमने भी मोहब्बत खूब निभाया,
वो पाक मोहब्वत वो इश्क का खूबसूरत मंजर,
जो मेरे एहसासों मे सदैव जीवंत रहा,
जिसे देखकर खुदा भी...और पढ़ें