पर्दानशीं...
पर्दानशीं...
पर्दा हटा,
चेहरा दिखा,
मुँह न छिपा...
पर्दानशीं...
पर्दा हटा,
चेहरा दिखा,
मुँह न छिपा...
दिल की किताब के
हर सफ़े पर,
तेरा ही नाम लिख रहा हूँ।
कोई मुझे खरीद रहा है,
मैं बेमोल बिक रहा हूँ।
आँखों के जादू से यूँ
बिजलियाँ न गिरा—
कुछ तो रहम कर,
दिल को यूँ न सज़ा...
पर्दानशीं...
पर्दा हटा,
चेहरा दिखा,
मुँह न छिपा...
देखे बहुत से दिलवर हमने,
पर तेरा न कोई सानी उनमें।
हर अक्स में तू ही उभरी,
इस ज़माने की कहानी में।
कुछ तो समझ तू
इस दिल का माजरा—
क्यों हर धड़कन में
बस तू ही तू है बसा...
पर्दानशीं...
पर्दा हटा,
चेहरा दिखा,
मुँह न छिपा...
जो भी तुझे देखे एक नज़र,
उसका खुदा पर ऐतबार हो जाए।
मायूस भी जो खुद से हो,
उसे खुद से प्यार हो जाए।
सर चढ़कर बोलेगा फिर
तेरे इश्क़ का नशा—
ऐ जानेमन, तू ही बता,
इसका क्या है इलाज़ भला...
पर्दानशीं...
पर्दा हटा,
चेहरा दिखा,
मुँह न छिपा...
-आचार्य अमित
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